महोबा में शनिवार को संपूर्ण समाधान दिवस के अवसर पर वकीलों ने तहसील में विरोध प्रदर्शन किया। जिला बार एसोसिएशन के नेतृत्व में वकीलों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा। वकीलों की मुख्य मांगों में मानचित्रों का भौतिक विभाजन और तहसील में व्याप्त भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाना शामिल था। वकीलों की प्रमुख मांग राजस्व संहिता की धारा 30(2) के तहत मिनजुमला और बटे वाले नंबरों का मानचित्र में तत्काल भौतिक विभाजन कराना है। वकीलों का आरोप है कि इस विभाजन के अभाव में वादकारियों को न केवल परेशानी हो रही है, बल्कि भ्रष्टाचार भी बढ़ रहा है।
वकील अजीत सिंह परिहार ने बताया कि राजस्व परिषद ने वर्ष 2018 और 2022 में स्पष्ट शासनादेश जारी किए थे। इन आदेशों में तीन महीने के भीतर मिनजुमला और बटे वाले नंबरों का भौतिक विभाजन करने का निर्देश दिया गया था, लेकिन धरातल पर इन निर्देशों का पालन नहीं हुआ है। इस तकनीकी खामी के कारण उपजिलाधिकारी द्वारा बंटवारे और हदबंदी के कई वाद खारिज कर दिए जाते हैं। वकीलों का कहना है कि इसका सीधा फायदा उन दबंगों को मिल रहा है, जो गरीबों की जमीन पर अवैध कब्जा जमाए बैठे हैं। प्रदर्शन के दौरान वकीलों ने तहसील प्रशासन पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप भी लगाए। वरिष्ठ अधिवक्ता बलदेव प्रसाद ने कहा कि मुकदमों तक के लिए रेट फिक्स कर दिए गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि रिश्वत न देने पर वकीलों और किसानों की बात अनसुनी कर दी जाती है, और उन्हें झूठे मुकदमों में फंसाने की साजिश रची जाती है। अधिवक्ताओं ने यह भी बताया कि वे स्वयं भी इस भ्रष्टाचार का शिकार हो रहे हैं। नायब तहसीलदार और कानूनगो जैसे अधिकारियों के खिलाफ कोर्ट में कई मामले लंबित हैं, जो तहसील में व्याप्त अनियमितताओं को उजागर करते हैं। अलावा, अधिवक्ताओं ने सन 1430 फसली के बाद के खसरे न मिलने की समस्या भी उठाई, जो लेखपालों द्वारा उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं। अधिवक्ताओं का कहना है कि उन्हें पिछले तीन साल से सिर्फ आश्वासन ही मिल रहे हैं, अब उन्हें ठोस कार्रवाई की दरकार है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए उपजिलाधिकारी शिवध्यान पांडे ने आश्वासन दिया है कि बार पदाधिकारियों की मांगों पर विचार किया जा रहा है। धारा 30(2) और नामांतरण से संबंधित मामलों के त्वरित निस्तारण के लिए विशेष टीमें गठित कर गांवों में भेजी जाएंगी।
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