मानसा में पहलवान संदीप का भव्य स्वागत:बोले- 12 साल की उम्र से ओलंपिक सपना, 14 साल की मेहनत से जीता रजत पदक




एशियाई खेलों में कुश्ती के 79 किलोग्राम भार वर्ग में रजत पदक जीतने वाले पहलवान संदीप सिंह मान का मानसा जिले के उनके पैतृक गांव बुर्जराठी पहुंचने पर भव्य स्वागत किया गया। ग्रामीणों ने फूलों की वर्षा की और गाड़ियों के काफिले के साथ उनका अभिनंदन करते हुए उन्हें सम्मानपूर्वक गांव तक ले गए। संदीप सिंह मान ने बताया कि वे एक साधारण किसान परिवार से आते हैं। उनके परिवार ने उनकी प्रशिक्षण और अन्य जरूरतों को पूरा करने के लिए कर्ज भी लिया था। उन्होंने यह भी बताया कि 12 साल की उम्र में उनके ताया जगजीत सिंह ने उन्हें भगता भाईके की कुश्ती अकादमी में दाखिला दिलाया था। तभी से उनका लक्ष्य ओलंपिक में देश के लिए पदक जीतना रहा है। उन्होंने अपनी यात्रा के दौरान कई चुनौतियों का सामना किया। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए कई बार उनके पास पैसे नहीं होते थे। ऐसे समय में उनके कोच ने उनकी आर्थिक मदद की और उनके आने-जाने व खाने-पीने का खर्च उठाया। सीमित संसाधनों के बावजूद, उन्होंने बसों और ट्रेनों में यात्रा करके अपनी मंजिल तक पहुंचने का दृढ़ संकल्प बनाए रखा। संदीप ने 14 साल की मेहनत का परिणाम बताया संदीप ने अपनी सफलता को 14 साल की कड़ी मेहनत का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि 79 किलोग्राम भार वर्ग में मुकाबला बेहद कड़ा था, लेकिन उन्होंने विभिन्न देशों के खिलाड़ियों को हराकर फाइनल में जगह बनाई और रजत पदक हासिल किया। शिरोमणि अकाली दल के नेता प्रेम कुमार अरोड़ा ने इस उपलब्धि को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि 22 साल बाद पंजाब को कुश्ती में यह सफलता मिली है और मानसा जिले के लिए यह पहला पदक है। अरोड़ा ने प्रशासनिक अधिकारियों की अनुपस्थिति पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी मौजूदगी से खिलाड़ी का मनोबल और बढ़ता। गांव के पूर्व सरपंच बलजिंदर सिंह सहित अन्य ग्रामीणों ने भी संदीप मान पर गर्व व्यक्त किया। उन्होंने सरकार से संदीप को ए-क्लास नौकरी प्रदान करने और गांव के विकास के लिए एक विशेष पैकेज की मांग की। संदीप के कोच सुखमंदर सिंह ने बताया कि संदीप शुरू से ही एक मेहनती और अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित खिलाड़ी रहे हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि संदीप भविष्य में ओलंपिक में भी देश के लिए पदक जीतकर इतिहास रचेंगे।



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