विश्व पुस्तक एवं कॉपीराइट दिवस के अवसर पर शासकीय मौलाना आजाद सेंट्रल लाइब्रेरी में 250 नई साहित्यिक पुस्तकों का लोकार्पण किया गया। इस मौके पर कलेक्टर और जिला पंचायत CEO ने पुस्तकालय का भ्रमण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया और स्वयं सदस्यता लेकर आम नागरिकों से भी पुस्तकालय से जुड़ने की अपील की। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने लाइब्रेरी में स्थापित RFID तकनीक, सेल्फ इश्यू-रिटर्न कियोस्क और OPAC सिस्टम का अवलोकन किया। उन्होंने व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाने पर जोर देते हुए तकनीकी उन्नयन की दिशा में काम तेज करने के निर्देश दिए। ट्रेनिंग सेंटर और संरक्षण पर जोर कलेक्टर ने पुस्तकालय में पुरानी पांडुलिपियों और गजेटियर के संरक्षण के लिए विशेष ट्रेनिंग सेंटर विकसित करने को कहा। साथ ही चयनित सदस्यों के सहयोग से लाइब्रेरी के विकास को गति देने की बात कही। उन्होंने लाइब्रेरी को राजा राममोहन राय लाइब्रेरी फाउंडेशन की योजनाओं से जोड़ने और INFLIBNET, शोधगंगा व गंगोत्री जैसे रिसर्च प्लेटफॉर्म पर पंजीयन कराने के निर्देश दिए, ताकि छात्रों और शोधार्थियों को बेहतर डेटा उपलब्ध हो सके। 117 साल पुरानी धरोहर, 1 लाख से अधिक किताबें वर्ष 1908 में स्थापित यह लाइब्रेरी प्रदेश की सबसे पुरानी ज्ञान-संस्थाओं में शामिल है, जहां एक लाख से अधिक दुर्लभ पुस्तकें और पांडुलिपियां संरक्षित हैं। डिजिटल मध्यप्रदेश की दिशा में यह प्रदेश की पहली RFID-युक्त शासकीय लाइब्रेरी बन चुकी है, जहां दुर्लभ ग्रंथों का डिजिटलीकरण तेजी से जारी है। लाइब्रेरी में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए स्टडी सर्किल और नि:शुल्क वाई-फाई जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं, जिससे यह युवाओं के लिए करियर हब के रूप में विकसित हो रही है।
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