संदिग्ध SBI खाते में 78 हजार की ठगी रकम जमा:साथी के साथ मिलकर फ्रॉड की राशि ले रहा था आरोपी, दोनों गिरफ्तार




साइबर अपराधों पर रोक लगाने के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान “म्यूल हंटर” के तहत पुलिस को संदिग्ध बैंक खातों की एक सूची मिली। इन खातों की जांच साइबर पुलिस पोर्टल और समन्वय पोर्टल के जरिए की गई। जांच के दौरान एक एसबीआई बैंक खाते पर शक गहरा गया, जिसके खिलाफ पहले से ही दिल्ली के नॉर्थ वेस्ट साइबर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज थी। इस शिकायत में बताया गया था कि एक व्यक्ति के साथ ऑनलाइन ठगी हुई और उसकी 78 हजार रुपए की रकम 23 जनवरी 2025 को इस खाते में पहली बार जमा करवाई गई थी। इसके बाद पुलिस ने इस खाते से जुड़े लेन-देन का पूरा रिकॉर्ड खंगालना शुरू किया, जिससे मामला और गंभीर होता चला गया। जांच में सामने आई पूरी साजिश जब साइबर थाने की ASI देऊ शर्मा मय जाप्ता कांस्टेबल धर्मपाल सिंह, कांस्टेबल महेन्द्र ने एसबीआई की चित्तौड़गढ़ शाखा से इस खाते का रिकॉर्ड लिया और जांच की, तो पता चला कि यह खाता मुकेश दास वैष्णव नाम के व्यक्ति के नाम पर है, जो आकोला थाना क्षेत्र के सुरताखेड़ा गांव का रहने वाला है। इसके बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची और मुकेश से पूछताछ की। पूछताछ में सामने आया कि 23 जनवरी को उसके खाते में 78 हजार रुपए जमा हुए थे, जिन्हें उसने उसी दिन चेक के जरिए 1 लाख 53 हजार रुपए के साथ निकाल लिया। यह रकम उसने भगवतीलाल जाट नाम के व्यक्ति को दे दी, जो कवेंरपुरा गांव का निवासी है। इसके कुछ ही समय बाद मुकेश के खाते में 3 लाख रुपए और नकद जमा हुए, जिन्हें भी उसने चेक के जरिए फतेहनगर से निकालकर फिर से भगवतीलाल को सौंप दिया। आरोपियों की मिलीभगत उजागर पूरी जांच के दौरान पुलिस को यह साफ हो गया कि मुकेश दास वैष्णव और भगवतीलाल जाट मिलकर काम कर रहे थे। दोनों ने पहले से योजना बनाकर ठगी की रकम अपने बैंक खातों में मंगवाई और फिर तुरंत निकालकर आगे पहुंचा दी, ताकि असली ठगों तक पहुंचना मुश्किल हो जाए। इस तरह के खातों को “म्यूल अकाउंट” कहा जाता है, जिनका इस्तेमाल सिर्फ ठगी की रकम को इधर-उधर करने के लिए किया जाता है। पुलिस के अनुसार, यह एक सोची-समझी साजिश थी, जिसमें दोनों आरोपियों ने अपराध को अंजाम देने में अहम भूमिका निभाई। फिलहाल पुलिस ने दोनों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और दोनों को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया।



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