हाईकोर्ट ने देरी से दाखिल 11 सरकारी अपीलें खारिज कीं:सरकारी विभागों की लापरवाही पर सख्त टिप्पणी, पीडब्ल्यूडी इंजीनियरों को राहत




इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने गुरुवार को राज्य सरकार द्वारा दाखिल 11 विशेष अपीलों को खारिज कर दिया है। न्यायालय ने कहा कि सरकार अपीलें दाखिल करने में हुई देरी के लिए पर्याप्त कारण प्रस्तुत नहीं कर सकी। इस फैसले के बाद पीडब्ल्यूडी के तमाम जूनियर इंजीनियरों को बड़ी राहत मिली है। यह आदेश मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह की खंडपीठ ने राम गोपाल गुप्ता व अन्य के विरुद्ध राज्य सरकार द्वारा अलग-अलग दाखिल विशेष अपीलों पर एक साथ सुनवाई करते हुए पारित किया। ये सभी अपीलें 9 सितंबर 2025 को एकल पीठ द्वारा दिए गए फैसले के खिलाफ दाखिल की गई थीं। एकल पीठ ने पीडब्ल्यूडी में 1984 से 1989 के बीच डेली वेजेज अथवा वर्क चार्ज कर्मचारी के रूप में नियुक्त जूनियर इंजीनियरों को 2006 के बजाय 2001 से विनियमित करने का आदेश दिया था। इस आदेश के परिणामस्वरूप, इन जूनियर इंजीनियरों को अन्य तमाम लाभों के साथ-साथ पुरानी पेंशन स्कीम का लाभ मिलना भी तय हो गया था। राज्य सरकार ने एकल पीठ के इस आदेश को विशेष अपीलें दाखिल कर चुनौती दी थी। अपीलों पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने पाया कि सभी अपीलें समय सीमा समाप्त होने के बाद दाखिल की गई थीं, जिनमें 93 दिन से लेकर 195 दिन तक की देरी थी। राज्य सरकार की ओर से अपीलों के दाखिल में देरी के लिए फाइलों के मूवमेंट, विभागीय प्रक्रिया, छुट्टियों और विधानमंडल सत्र जैसे कारण बताए गए। हालांकि, खंडपीठ ने इन कारणों को पर्याप्त नहीं माना। न्यायालय ने टिप्पणी की कि सरकार के पास सुव्यवस्थित तंत्र और संसाधन होते हैं, ऐसे में सिर्फ प्रशासनिक प्रक्रियाओं का हवाला देकर देरी को उचित नहीं ठहराया जा सकता। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि देरी माफी के आवेदन पर विचार करते समय मुख्य प्रश्न यह होता है कि देरी के लिए उचित कारण है या नहीं, और सरकारी विभागों की सुस्ती को बढ़ावा नहीं दिया जा सकता।



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