ग्वालियर की जेसी मिल से जुड़े हजारों मजदूरों के लिए राहत भरी खबर है। करीब 29 साल से लंबित देनदारी और संपत्ति विवाद अब अंतिम चरण में पहुंच गया है। हाईकोर्ट में जल्द ही इस मामले पर निर्णायक सुनवाई होने की संभावना है। बुधवार को जस्टिस जी.एस. अहलूवालिया के अवकाश पर होने के कारण सुनवाई नहीं हो सकी और तारीख आगे बढ़ा दी गई। अब जस्टिस अहलूवालिया की बेंच ही अंतिम बहस सुनकर फैसला सुनाएगी। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने इस मामले की सुनवाई रेगुलर बेंच में करने का निर्णय लिया है। 1997 से लंबित है मामला यह विवाद साल 1997 से लंबित है। इसके चलते न तो मिल की संपत्तियों का पूरी तरह निपटारा हो पाया है और न ही मजदूरों को उनका पूरा भुगतान मिल सका है। बुधवार को मामला जस्टिस मिलिंद रमेश फड़के की बेंच में सूचीबद्ध था, लेकिन बेंच ने इसे रेगुलर बेंच के लिए ही निर्धारित रखा। इस बीच कई बैंक भी पक्षकार बन चुके हैं और अपनी देनदारी का दावा कर रहे हैं। जमीन और देनदारी का विवाद जेसी मिल बंद होने के बाद हाईकोर्ट के आदेश पर परिसमापक नियुक्त किया गया था। शासन द्वारा लीज पर दी गई जमीन सरकार को वापस मिल चुकी है, लेकिन मिल की निजी स्वामित्व वाली जमीन अभी भी विवाद में है। सरकार चाहती है कि इस जमीन को नीलाम कर मजदूरों की देनदारी चुकाई जाए। वहीं, मजदूर परिवार वर्षों से अपने हक का इंतजार कर रहे हैं। अब नहीं मिलेगी अनावश्यक तारीख हाईकोर्ट पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि अब इस मामले में अनावश्यक तारीखें नहीं दी जाएंगी। रेगुलर बेंच में सुनवाई शुरू होते ही अंतिम बहस होगी और जल्द फैसला आने की उम्मीद है। मजदूरों को उम्मीद है कि इस लंबे समय से चले आ रहे विवाद का अंत होगा और उनके भुगतान का रास्ता साफ हो सकेगा।
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