92 साल की बुजुर्ग महिला पेंशन रोकने पर हाईकोर्ट पहुंची:कहा-तकनीकि खामी से जीवत प्रमाण पत्र अपलोड नहीं हो रहा, विभाग व्यक्तिगत उपस्थित होने पर अड़ा




जयपुर निवासी 92 साल की बुजुर्ग महिला ने पारिवारिक पेंशन रोकने पर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया हैं। महिला ने कोर्ट मे याचिका दायर करके कहा है कि वह चलने फिरने में असमर्थ है और पूरी तरह से अपने 70 साल के बेटे-बहु पर निर्भर हैं। तकनीकि खामी के कारण उनका जीवित प्रमाण-पत्र अपलोड नहीं होने से उनकी पेंशन रोक दी गई है और उनसे व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने की अपेक्षा की जा रही है। विभाग उन पर आधार अथवा जन-आधार कार्ड के जरिए सत्यापन का दबाव बना रहा है। जबकि इस उम्र में उनके बायोमेट्रिक्स (अंगूठे के निशान) काम नहीं करते और वह शारीरिक रूप से कार्यालय जाने में अक्षम हैं। याचिका में विभाग के इस रवैए को उन्होने इसे उन्होने जीवन के अधिकार का उल्लंघन बताया गया है। उम्मीद करते है दो महीने में पेंशन जारी हो जाएगी
हाईकोर्ट मे जस्टिस रवि चिरानिया ने बुजुर्ग महिला गंगा देवी की याचिका पर राज्य सरकार, निदेशक पेंशन व पेंशन वैलफेयर और वित्त विभाग के प्रमुख सचिव से चार सप्ताह में जवाब मांगा है। कोर्ट ने आशा व्यक्त की है कि याचिकाकर्ता की रुकी हुई पेंशन दो महीने में जारी कर दी जाएगी। व्यक्तिगत रूप से उपस्थिति असंवैधानिक
याचिका में गंगा देवी ने कहा कि वह राजस्थान सरकार के पूर्व उप-सचिव की विधवा हैं। इस आयु में वह हृदय रोग और रीढ़ की हड्डी की गंभीर चोट से जूझ रही हैं। वह बिना वॉकर या सहारे के एक कदम भी नहीं चल सकतीं। पेंशन विभाग के तकनीकी सिस्टम में खराबी के कारण उनका जीवित प्रमाण पत्र अपलोड नहीं हो रहा है। धरातल पर बुजुर्गों की तकलीफें दिखाई नहीं देतीं। एक ऐसी महिला जिसे अपनी गरिमा के साथ जीने का अधिकार है उसे तकनीकी खामियों के नाम पर भूखा रहने या दफ्तरों के चक्कर लगाने पर मजबूर करना असंवैधानिक है। डोर-स्टेप वेरिफिकेशन अनिवार्य हो
याचिकाकर्ता ने गुहार की है कि 75 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गों के लिए कार्यालय में उपस्थिति की शर्त खत्म कर डोर-स्टेप वेरिफिकेशन (घर पर सत्यापन) की व्यवस्था अनिवार्य की जाए। वहीं चिकित्सा और दैनिक खर्चों के लिए तत्काल 15 लाख रुपये की अंतरिम सहायता राशि दिलवाई जाए। 25 लाख सरकार के पास बकाया
याचिका में आरोप लगाया गया है कि साल 2009 से उनकी आयु के अनुसार पेंशन के स्लैब में वृद्धि नहीं की गई। उनका लगभग 24,53,438 रुपये का एरियर (बकाया) सरकार के पास लंबित है। याचिकाकर्ता ने 2009 से अब तक का कुल बकाया करीब 25 लाख रुपए 18% ब्याज के साथ दिलवाने की गुहार की है।



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