शादी की तो एडमिशन रद्द…GNM कॉलेज का आदेश वापस:प्रिंसिपल बोलीं- शादी रोकना मकसद नहीं, 100% अटेंडेंस चाहिए था




‘शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार किसी छात्रा की वैवाहिक स्थिति से बाधित नहीं किया जा सकता। स्वास्थ्य विभाग या नर्सिंग काउंसिल की किसी नियमावली में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है।’ ये बयान गोपालगंज के सिविल सर्जन डॉ.वीरेंद्र प्रसाद का है। दरअसल, 5 दिन पहले हथुआ स्थित GNM स्कूल प्रशासन की ओर से जारी एक नोटिस में छात्राओं को एकेडमिक सेशन के दौरान शादी नहीं करने का निर्देश दिया था। इसके साथ ही कहा गया था कि अगर कोई छात्रा इस अवधि में शादी करती हैं तो उसका नाम तुरंत कॉलेज से रद्द कर दिया जाएगा। नोटिस सामने आते ही स्टूडेंट्स और पेरेंट्स में नाराजगी फैल गई। सोशल मीडिया पर इसको लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी गई। मामला बढ़ने पर जिला प्रशासन हरकत में आया और जांच के आदेश दिए। वहीं, संस्थान की प्रिंसिपल मानसी सिंह ने कहा, ‘जारी किए गए पत्र का उद्देश्य किसी छात्रा की शादी रोकना या किसी की भावनाओं को आहत करना नहीं था। संस्थान की मंशा केवल यह थी कि ट्रेनिंग के दौरान छात्राएं अपनी पढ़ाई और उपस्थिति को गंभीरता से लें।’ अब सिलसिलेवार तरीके से पढ़िए पूरी खबर… 16 अप्रैल को जारी हुआ था आदेश पत्र हथुआ GNM कॉलेज के लेटरहेड पर 16 अप्रैल 2026 को एक आदेश जारी किया गया था। इस आदेश में साफ लिखा गया था कि सभी छात्राओं को सूचित किया जाता है कि एकेडमिक सेशन के दौरान शादी करना प्रतिबंधित है। अगर कोई छात्रा इस अवधि में शादी करती है, तो इसकी सूचना विभाग को दी जाएगी और उसका नामांकन तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया जाएगा। पत्र पर कॉलेज की मुहर और प्रिंसिपल मानसी सिंह के सिगनेचर भी थे। इसकी वजह से इसे संस्थान का आधिकारिक आदेश माना गया। नोटिस सामने आने के बाद छात्राओं और उनके परिजनों के बीच असमंजस की स्थिति बन गई। कई छात्राओं ने इसको लेकर आपत्ति जताई। छात्राओं के बीच दुविधा, परिजनों में नाराजगी नोटिस वायरल होने के बाद जीएनएम स्कूल में पढ़ने वाली छात्राओं के बीच चिंता बढ़ गई। कई छात्राओं का कहना है कि नर्सिंग जैसे प्रोफेशनल कोर्स में पहले से ही पढ़ाई, ट्रेनिंग, हॉस्टल अनुशासन और क्लिनिकल ड्यूटी का दबाव रहता है। ऐसे में निजी जीवन से जुड़े फैसलों पर भी रोक लगाने की कोशिश गलत संदेश देती है। कुछ परिजन का कहना है कि शादी परिवार का सामाजिक फैसला होता है। ऐसे में कोई संस्थान इस पर रोक कैसे लगा सकता है? वहीं, कुछ पेरेंट्स ने यह भी माना कि अगर पढ़ाई बीच में छूटती है, तो छात्राओं का करियर प्रभावित होता है। प्रिंसिपल बोलीं- शादी रोकना मकसद नहीं था मामला बढ़ने पर संस्थान की प्रिंसिपल मानसी सिंह सामने आईं। उन्होंने कहा कि नोटिस का उद्देश्य किसी छात्रा की शादी रोकना या किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था। संस्थान की मंशा सिर्फ इतनी थी कि छात्राएं ट्रेनिंग के दौरान पढ़ाई और उपस्थिति को गंभीरता से लें। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ समय से कई छात्राओं के परिवारों की ओर से शादी की बातचीत चलने की जानकारी मिल रही थी। इसके कारण पढ़ाई और ट्रेनिंग दोनों प्रभावित हो रहे थे। संस्थान में 100 प्रतिशत क्लिनिकल अटेंडेंस और 85 प्रतिशत थ्योरी अटेंडेंस जरूरी है, लेकिन शादी होने के बाद कई छात्राएं छुट्टियां लेने लगती हैं। इससे उनकी अटेंडेंस पूरी नहीं हो पाती है। बाद में पेरेंट्स की ओर से दबाव बनाया जाता है कि कम अटेंडेंस के बावजूद परीक्षा में बैठने दिया जाए और उसी सत्र में पास कराया जाए, जो नियमों के खिलाफ है। ‘यह कोई नियम नहीं, सिर्फ चेतावनी थी’ प्रिंसिपल ने स्पष्ट किया कि ऐसा कोई सरकारी नियम या मैन्युअल नहीं है, जिसमें ट्रेनिंग अवधि के दौरान शादी पर रोक की बात कही गई हो। यह सिर्फ छात्राओं को सतर्क करने और कॉलेज के नियमों को फॉलो करने के लिए था। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि अब इस पत्र को वापस ले लिया गया है। यह कोई जरूरी प्रशासनिक आदेश नहीं था। पिछले सत्र का अनुभव बना वजह प्रिंसिपल ने कहा कि पिछले सत्र में कुछ छात्राओं की अनुपस्थिति के कारण संस्थान को काफी परेशानी झेलनी पड़ी थी। कई छात्राएं शादी या पारिवारिक कारणों से लगातार छुट्टी पर रहीं, जिससे उनकी क्लिनिकल ट्रेनिंग और थ्योरी क्लास प्रभावित हुई। नर्सिंग शिक्षा में सिर्फ किताबें पढ़ना काफी नहीं है। अस्पताल में ड्यूटी, मरीजों की देखभाल, व्यवहारिक प्रशिक्षण और नियमित उपस्थिति बेहद जरूरी है। अगर छात्राएं बीच-बीच में अनुपस्थित रहती हैं, तो कोर्स की गुणवत्ता प्रभावित होती है। डीएम ने 24 घंटे में मांगी रिपोर्ट गोपालगंज डीएम पवन कुमार सिन्हा ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। उन्होंने हथुआ एसडीएम को वायरल नोटिस की जांच करने का निर्देश दिया है। डीएम ने कहा है कि 24 घंटे के भीतर जांच रिपोर्ट उपलब्ध कराए। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, जांच में यह देखा जाएगा कि नोटिस किस परिस्थिति में जारी किया गया है। क्या यह नियमों के अनुरूप था और क्या छात्राओं के अधिकारों का उल्लंघन हुआ है। सिविल सर्जन ने क्या कहा? गोपालगंज के सिविल सर्जन वीरेंद्र प्रसाद ने बताया कि ऐसा निर्देश दो साल पहले भी चर्चा में आया था। उन्होंने कहा कि जब छात्राओं का एडमिशन होता है, तब उन्हें कोर्स से जुड़े नियमों की जानकारी दी जाती है। नर्सिंग कोर्स में प्रैक्टिकल, ट्रेनिंग, हॉस्टल अनुशासन और ड्यूटी से जुड़े नियमों का पालन करना जरूरी होता है। हालांकि शादी पर पूरी तरह पाबंदी नहीं है। कोर्स के बीच में शादी होने पर कई बार छात्राएं पढ़ाई पूरी नहीं कर पातीं, इसलिए संस्थान पढ़ाई पहले पूरी करने की सलाह देता है।



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