शराब नीलामी में राजस्व की 'राजधानी' बना इंदौर:प्रदेश की झोली में अकेले डाले 432 करोड़ अतिरिक्त; भोपाल-ग्वालियर को पीछे छोड़ा




मध्य प्रदेश में साल 2026-27 के लिए शराब दुकानों की नीलामी ने सरकार के खजाने को लबालब कर दिया है। इस पूरी प्रक्रिया में एक बार फिर ‘मिनी मुंबई’ कहे जाने वाले इंदौर ने अपनी आर्थिक ताकत का लोहा मनवाया है। इंदौर ने अकेले सरकार को 432.74 करोड़ रुपए का अतिरिक्त राजस्व दिलाया है, जो राज्य के किसी भी अन्य जिले की तुलना में सबसे अधिक है। इंदौर जिले की कुल 173 शराब दुकानों की नीलामी ने इस बार सभी समीकरण बदल दिए। पिछले वित्तीय वर्ष (2025-26) में इन दुकानों का वार्षिक मूल्य 1752.02 करोड़ रुपए था, जो इस बार की बोली में उछलकर 2184.76 करोड़ रुपए के पार पहुंच गया। सीधे तौर पर 24.70 फीसदी की रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई। इंदौर की बादशाहत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि दूसरे स्थान पर रहे धार जिले (126.54 करोड़) से इंदौर की अतिरिक्त आय तीन गुना से भी ज्यादा है। वहीं ग्वालियर और रायसेन जैसे बड़े जिले भी इंदौर के मुकाबले कहीं नहीं टिक पाए। नाइट लाइफ और कॉर्पोरेट कल्चर ने बढ़ाई बिक्री विशेषज्ञों का मानना है कि इंदौर में शराब की दुकानों के लिए लगी इतनी ऊंची बोली सिर्फ एक इत्तेफाक नहीं है। शहर का लगातार होता भौगोलिक विस्तार, राऊ, सांवेर और सुपर कॉरिडोर जैसे इलाकों का विकास और तेजी से बढ़ता नाइटलाइफ कल्चर इसके पीछे की मुख्य वजह है। इंदौर में सबसे ज्यादा आया राजस्व मालवा-निमाड़ का दबदबा बरकरार इस नीलामी के परिणामों ने साफ कर दिया है कि आबकारी आय के मामले में मालवा-निमाड़ बेल्ट पूरे मध्य प्रदेश का नेतृत्व कर रहा है। इंदौर के साथ-साथ धार, खरगोन और खंडवा जैसे जिलों ने भी राजस्व में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। राजधानी भोपाल, जहां 87 दुकानें हैं, वहां से अतिरिक्त राजस्व मात्र 12.96 करोड़ रुपए ही मिल पाया। राजस्व का रिकॉर्ड लेकिन चुनौतियां भी बड़ी भले ही इंदौर सरकार के लिए सबसे भरोसेमंद राजस्व केंद्र बन गया हो, लेकिन इस भारी-भरकम बोली के साथ चुनौतियां भी बढ़ गई हैं। जानकारों का कहना है कि जब ठेकेदार इतनी ऊंची कीमत पर दुकान लेते हैं, तो उन पर बिक्री बढ़ाने का भारी दबाव होता है। ऐसे में प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती नशा नियंत्रण, अवैध शराब की बिक्री को रोकना और जिम्मेदार उपभोग सुनिश्चित करने की होगी।



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