इंदौर के भागीरथपुरा चौकी में श्रीराम पुत्र रमेशचंद झा की मौत के मामले में वरिष्ठ अधिकारियों ने चौकी प्रभारी संजय धुर्वे और सिपाही योगेंद्र कोरव को हटा दिया है। साथ ही, दोनों के खिलाफ जांच शुरू कर दी गई है। श्रीराम को गाड़ी चोरी के मामले में चौकी लाया गया था, जहां दो दिन तक उसके साथ प्रताड़ना होने की बात सामने आई है। यह जानकारी उसने अपने परिजनों को दी थी। भागीरथपुरा चौकी में श्रीराम ने एसिड पी लिया था, उसकी मौत हो गई। परिवार में उसकी मां, दो भाई, पत्नी और एक बच्चा हैं। सोमवार को पुलिस की मौजूदगी में उसका अंतिम संस्कार कराया गया, इस दौरान मौके पर पुलिस अधिकारी भी मौजूद रहे। मां का आरोप है कि रविवार को सादी वर्दी में दो पुलिसकर्मी श्रीराम को घर लेकर आए थे। उन्होंने आधार कार्ड मांगा और बातचीत की। इसी दौरान श्रीराम ने बताया कि उसके साथ मारपीट की गई है और उसका अंगूठा काम नहीं कर रहा, उसे तोड़ दिया गया है। परिवार का कहना है कि इसी प्रताड़ना से आहत होकर उसने यह कदम उठाया। परिवार के मुताबिक, पुलिसकर्मियों ने कहा था कि सोमवार को उसके खिलाफ वाहन चोरी की एफआईआर दर्ज की जाएगी या प्रतिबंधात्मक कार्रवाई कर उसे जेल भेजा जाएगा। इसके बाद पुलिस उसे अपने साथ ले गई। वहीं, पुलिस अधिकारियों ने मारपीट के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि एसिड पीने के बाद उसकी तबीयत बिगड़ी। फिलहाल, पूरे मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। नौकरी, पढ़ाई और 25 लाख की पेशकश पुलिस सूत्रों के मुताबिक, श्रीराम झा के परिवार में उसके बच्चे की पढ़ाई, पत्नी को नौकरी और 25 लाख रुपए की पेशकश अधिकारियों द्वारा इस मामले में आगे कार्रवाई न करने के लिए की गई। बताया जाता है कि 15 अप्रैल 2026 को भी पत्नी ने श्रीराम को लेकर बाणगंगा में शिकायत की थी, जिस पर पुलिस ने एनसीआर दर्ज की थी। सट्टा कांड में नपे थे एसआई संजय धुर्वे एसआई संजय धुर्वे पहले हीरानगर थाने में पदस्थ थे। विवेचनाओं में गलती के चलते उन्हें हटाकर ग्वालटोली थाने भेजा गया। वहां से बाद में उनका ट्रांसफर विजयनगर हो गया। नाबालिग को सट्टा कांड में फंसाने के मामले में यहां भी उनके खिलाफ कार्रवाई हुई और उन्हें हटा दिया गया। संजय के दोस्तों ने बताया कि उनकी पारिवारिक स्थिति ठीक नहीं है। उन्होंने अपने भाई-बहनों की शादी के लिए अब तक खुद शादी नहीं की और लगातार नौकरी करते रहे हैं। जीजा के कारण चल रही थी नौकरी योगेंद्र कोरव ने सबसे पहले श्रीराम को पकड़ा था। बताया जाता है कि दो दिन तक एक ढाबे से योगेंद्र के लिए खाने का इंतजाम किया जा रहा था। बाणगंगा थाने के हेड कॉन्स्टेबल संजय बामने, योगेंद्र के साले हैं, जो तीन बार थाने से हटने के बाद फिर वापस आ चुके हैं। संजय का कुछ समय पहले एक बार वाले से विवाद हुआ था, जिसके चलते उन्हें हटाया गया था। योगेंद्र के साथ वे पहले बाणगंगा में वारंट तामिली का काम देख रहे थे, बाद में उन्हें चौकी पर भेज दिया गया।
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