नमस्कार डीग में विधायक मैडम ने जनता से कह दिया-आपके लिए घर, दफ्तर और दिल के दरवाजे खुले हैं। नारी शक्ति वंदन अधिनियम बिल क्या गिरा, जयपुर में डिप्टी CM साहिबा विरोधियों पर भड़क उठीं। झुंझुनूं में पूर्व मंत्रीजी बकरी का बच्चा लेकर थाने पहुंच गए और बारां में BSS प्रमुख ने बड़ी खरी बात कही। राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में.. 1. विधायक नौक्षम बोलीं-‘दिल के दरवाजे खुले हैं’ कामां विधायक नौक्षम चौधरी डीग में एक सभा पहुंचीं। सभा विकास कार्यों के उद्घाटन की थी। चुनाव और उद्घाटन के वक्त नेताजी हमेशा उदारमना व्यवहार करते हैं। नौक्षम तो वैसे भी जनता के बीच पहुंचने के लिए चर्चा में रहती हैं। सौगात देते हुए विधायक मैडम ने जनता से मन की बात कर ली। बोलीं- मेरे घर, दफ्तर और दिल के दरवाजे आप के लिए हमेशा खुले हैं। कहने के लिए नहीं कह रही हूं। मैं तो पीए तक नहीं रखती। खुद सारे फोन अटैंड करती हूं। मेरे भाई-बहन तो हैं नहीं, इसलिए मैं आपको ही अपना परिवार मानती हूं। मैडम गांव-गांव और पंचायत-पंचायत जाकर हजारों करोड़ रुपए के विकास कार्यों का लोकार्पण और शिलान्यास कर रही हैं। बहुत बिजी हैं। 2. डिप्टी CM साहिबा को आया ‘गुस्सा’ डिप्टी सीएम साहिबा अपनी सौम्यता और सरलता के लिए जानी जाती हैं। लेकिन उन्हें गुस्सा आ गया। भयंकर गुस्सा आया। नारी शक्ति वंदन अधिनियम का विरोधी दलों ने समर्थन नहीं किया। बिल पारित नहीं हो सका। देशभर में सत्ताधारी पार्टी के नेताओं का गुस्सा फूट रहा है। जयपुर में डिप्टी सीएम दिया कुमारी का गुस्सा फूटा। वे बोलीं- कांग्रेस और उनके सभी सहयोगी दलों ने इसका विरोध किया। इससे ज्यादा शर्म की बात कोई हो सकती है क्या? इनको चुल्लू भर पानी में डूब जाना चाहिए। एक आम महिला को अवसर मिल रहा था। उसको भी छीन लिया। 3. बकरी का बच्चा लेकर थाने पहुंचे पूर्व मंत्री झुंझुनूं का छोटा सा गांव मैनपुरा। एक गरीब किसान परिवार की 15-16 बकरियां चोरी हो गईं। ग्रामीण इलाके में चोरियां लगातार हो रही हैं। कई मामले सामने आ चुके। पुलिस से शिकायतें हुईं लेकिन चोरियां थमी नहीं। बकरियां चोरी हुईं तो परिवार की बूढ़ी दादी अपने आंसू नहीं रोक पाई। बोली- बकरियों से ही संसार था। दूध बेचती नहीं थी। राबड़ी बनाती थी। अब मैं क्या करूंगी। मेरा तो कलेजा ही निकाल लिया। दादी के आंसू बहने लगे। गरीब की बेबसी से निकली आह बड़ी मारक होती है। वीडियो सोशल मीडिया पर आ गया। बकरियों के लिए आंदोलन हो गया। गांव वाले थाने पहुंच गए। पूर्व मंत्री राजेंद्र गुढ़ा को जब मामले का पता चला तो वे भी थाने पहुंच गए। एक बकरी के बच्चे को गोद में उठाया और थानेदार साहब से बोले-अब इसका क्या होगा? इसकी मां को ले गए। ये चारा भी नहीं चरता, मां का दूध पीता है। पुलिसवाले बगलें झांकने लगे। फिर दो-तीन का समय मांगकर जांच में तेजी लाने का आश्वासन दे दिया। 4. चलते-चलते.. युवा नेताजी तेजी से लोकप्रिय हुए। लोकप्रिय होने की राह में थप्पड़ भी शामिल है। एक बार जेल जा आए हैं। भगत सिंह सेना बनाकर उसके प्रमुख बन गए हैं। कई चुनाव लड़े, हारे लेकिन छाप गहरी छोड़ी। जनता के बीच पहुंच जाते हैं। सड़क पर बैठक जमा लेते हैं। इस वक्त सावों का दौर चल रहा है। आखा तीज का तगड़ा सावा। ऐसे में न्योतों का अंबार लगा हुआ है। कहां जाएं, कहां न जाएं। ऐसे में कई समर्थक शादी के कार्ड पर उनकी फोटो छपाने से भी नहीं चूक रहे। बारां में ऐसा ही एक समर्थक टकरा गया। शादी का कार्ड थमाया। बोला- जरूर पधरना है। नेताजी ने अपील कर दी- मेरी फोटो शादी के कार्डों पर न छपाएं। फोटो मरने के बाद छपती है। अभी तो मैं जिंदा हूं। नेताजी की बात पर ठहाका गूंज उठा। इनपुट सहयोग- मुकेश कुमार जांगिड़ (डीग), शुभम निमोदिया (बारां), महवीर बैरवा (टोंक)। वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल मुलाकात होगी
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