भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने नावां नगरपालिका में पट्टा जारी करने के नाम पर हुए भ्रष्टाचार के मामले में कार्रवाई की है। ब्यूरो ने तत्कालीन अधिशाषी अधिकारी शिकेश कांकरिया, टाउन प्लानर प्रिंस सैनी, वरिष्ठ सहायक सुरेश मीणा और दो लाभार्थियों के विरुद्ध षड्यंत्र रचने और पद के दुरुपयोग का मामला दर्ज किया है। जांच में सामने आया कि अधिकारियों ने मिलीभगत की और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पट्टे जारी किए थे। तत्कालीन टाउन प्लानर प्रिंस सैनी ने मौके पर खाली पड़े भूखंड और दुकानों को कागजों में आवासीय मकान बताकर झूठी रिपोर्ट पेश की थी। इसी रिपोर्ट को आधार बनाकर तत्कालीन ईओ ने लाभार्थियों के पक्ष में पट्टे जारी कर दिए। आरोपी लाभार्थियों ने अपने वार्ड नंबर 8 के पुराने दस्तावेजों का उपयोग वार्ड नंबर 3 में स्थित विवादित भूखंडों का पट्टा लेने के लिए भी किया था। फर्जी दस्तावेजों से जारी किए पट्टें
जांच में सामने आया कि पीड़ित महताब सिंह की पत्नी ने जिस भूखंड के लिए दिसंबर 2021 में आवेदन किया था, उसकी फाइल को अधिकारियों ने जानबूझकर पेंडिंग में छोड़ दिया और विपक्षी दल से साठ-गांठ उन्हें कब्जा दिला दिया। हालांकि नगरपालिका ने बाद में इन पट्टों को निरस्त कर दिया था, जिसे राजस्थान हाईकोर्ट ने भी सही ठहराते हुए लाभार्थियों की याचिकाएं खारिज कर दीं। फिलहाल एसीबी की अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अजमेर वंदना भाटी पूरे मामले की जांच कर रही है। बता दें कि इससे पहले नागौर ACB की ASP कल्पना सोलंकी ने इस प्रकरण की प्राथमिक जांच की थी। उनकी जांच में सामने आया था कि प्रशासन शहरों के संग अभियान के दौरान पट्टे के लिए आवेदन करने वालों की पत्रावली अधूरी छोडकर अन्य लोगों को पट्टे जारी किए गए। जिन्हें दिए पट्टें, उनके पास कागज ही नहीं थे
इनमें जिन लोगों को पट्टा दिया गया, उनके पास उचित दस्तावेज भी नहीं थे और प्रक्रिया में नियमों का पालन भी नहीं किया गया था। जांच में दोषी पाए जाने के बाद अब इस मामले में एफआईआर दर्ज कर ली गई है, जिसकी जांच अजमेर में वंदना भाटी को सौंपी गई है। बता दें कि शिकेश कांकरिया वर्तमान में कुचामन नगरपरिषद आयुक्त के पद पर कार्यरत हैं। जबकि नावां और जायल नगपलिका ईओ का अतिरिक्त प्रभार भी उनके पास है।
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