राजस्थान बार काउंसिल (BCR) के चुनाव 8 साल बाद 22 अप्रैल को होंगे। इस चुनाव में देश की आधी आबादी की ऐतिहासिक छलांग दिख रही है। करीब 33 साल पहले जहां महिला एडवोकेट्स की संख्या करीब 1200 थी। वहीं अब यह बढ़कर लगभग 22 हजार के आसपास पहुंच चुकी है। BCR की 25 सदस्यीय परिषद के लिए हो रहे चुनाव का एक रोचक पहलू इन महिला अधिवक्ताओं की भागीदारी और उनके लिए किया ऐतिहासिक आरक्षण है। प्रदेशभर के 84 हजार 247 मतदाता एडवोकेट बुधवार को मताधिकार का प्रयोग करेंगे, जो सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में होगा। 1993 से 2026 तक: 1200 से 22 हजार तक का सफर इस चुनाव के आंकड़े में प्रदेश में महिला सशक्तीकरण की मजबूत तस्वीर दिखाई देती है। वर्ष 1993 में जब सुनीता सत्यार्थी बार काउंसिल की पूर्व सदस्य के रूप में निर्वाचित हुई थीं, तब राजस्थान में केवल 1,200 महिला वकील रजिस्टर्ड थीं। अब यह आंकड़ा 22 हजार को पार कर चुका है। यानी पिछले तीन दशकों में वकालत के पेशे में महिलाओं की संख्या में करीब 18 गुना का इजाफा हुआ है, जो इस बार के चुनाव परिणामों को निर्णायक रूप से प्रभावित करेगा। एक सीट के लिए 11 दावेदार: 5 सीटों पर 57 महिला प्रत्याशी बार काउंसिल के इतिहास में पहली बार है, जब प्रत्यक्ष निर्वाचन वाले 23 पदों में से 5 पद महिलाओं के लिए विशेष रूप से आरक्षित किए गए हैं। इन 5 आरक्षित सीटों पर कब्जा जमाने के लिए 57 महिला प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। इसका सीधा अर्थ है कि प्रत्येक आरक्षित सीट पर औसतन 11 महिलाओं के बीच कड़ा मुकाबला है। चुनाव में कुल 234 रिकॉर्ड प्रत्याशी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। इनमें महिला उम्मीदवारों का उत्साह ऐतिहासिक है। शेष 2 पदों पर बाद में महिलाओं को मनोनीत किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट की निगरानी और सिंगल ट्रांसफरेबल वोटिंग सिस्टम यह पूरी चुनाव प्रक्रिया ‘एकल हस्तांतरणीय मत’ (Single Transferable Vote) प्रणाली से पूरी होगी। इसमें अधिवक्ता एक ही वोट देंगे, लेकिन उन्हें मतपत्र पर उम्मीदवारों को 1, 2, 3 के वरीयता क्रम में अंकित करना होगा। मतदान प्रक्रिया को निष्पक्ष बनाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश सुधांशु धूलिया देशभर के चुनावों की निगरानी कर रहे हैं। राजस्थान के लिए दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जे. आर. मिड्ढा की तीन सदस्यीय समिति और राजस्थान हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश मनोज गर्ग को ऑब्जर्वर नियुक्त किया गया है। इस बार के चुनाव के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की अहम जिम्मेदारी वरिष्ठ अधिवक्ता सचिन आचार्य निभा रहे हैं। 239 मतदान केंद्रों पर सुबह 8 बजे से वोटिंग प्रदेशभर में स्थापित 239 मतदान केंद्रों पर बुधवार सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक वोट डाले जाएंगे। प्रत्येक बूथ पर स्थानीय उपखंड अधिकारी ऑब्जर्वर की भूमिका में तैनात रहेंगे। मतदान के बाद 22 से 28 अप्रैल तक मतपेटियों का संकलन किया जाएगा और 29 अप्रैल से वोटों की गिनती शुरू होगी।
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