Bihars Trisha Bhattacharya Wins Natl Bharatnatyam Scholarship 2025-26


बिहार की युवा नृत्यांगना तृषा भट्टाचार्य को भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय की प्रतिष्ठित ‘कल्चरल टैलेंट सर्च स्कॉलरशिप स्कीम 2025-26’ के लिए चुना गया है। उन्हें भारतनाट्यम श्रेणी में यह राष्ट्रीय छात्रवृत्ति मिली है। इस उपलब्धि के साथ, तृषा बिहार से

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यह छात्रवृत्ति देशभर के उन प्रतिभाशाली कलाकारों को दी जाती है, जिनमें शास्त्रीय कला के क्षेत्र में आगे बढ़ने की क्षमता होती है। तृषा का चयन रीजनल सेलेक्शन कमेटी की ओर से मूल्यांकन के बाद किया गया। कम उम्र में राष्ट्रीय स्तर पर यह मुकाम हासिल करना एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।

मंच पर प्रस्तुति देंती तृषा।

मंच पर प्रस्तुति देंती तृषा।

अभ्यास, अनुशासन और कला से मुकाम तक पहुंचीं

‘कल्चरल टैलेंट सर्च स्कॉलरशिप स्कीम’ के लिए देशभर से हजारों आवेदन आते हैं, जिनमें से कुछ ही प्रतिभाएं अंतिम रूप से चयनित हो पाती हैं। तृषा ने अपनी कला, तकनीक और प्रभावशाली अभिव्यक्ति से निर्णायकों को प्रभावित किया। भारतनाट्यम जैसी शास्त्रीय नृत्य शैली में उनकी मजबूत पकड़ और मंच प्रस्तुति ने उन्हें इस कठिन प्रतिस्पर्धा में सफल बनाया।

यह उपलब्धि न केवल तृषा के लिए, बल्कि बिहार के कला जगत के लिए भी गर्व का विषय है। यह धारणा रही है कि शास्त्रीय नृत्य में दक्षिण भारत का अधिक दबदबा है, लेकिन तृषा ने इसे तोड़ते हुए साबित किया है कि प्रतिभा किसी क्षेत्र विशेष तक सीमित नहीं होती।

तृषा की इस सफलता में उनकी गुरु सुदीपा बोस का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उनके मार्गदर्शन में तृषा ने अपनी कला को तकनीकी और भावनात्मक दोनों स्तरों पर निखारा। गुरु-शिष्य परंपरा का यह उदाहरण प्रेरणादायक माना जा रहा है।

नियमित अभ्यास, अनुशासन और कला के प्रति समर्पण ने तृषा को इस मुकाम तक पहुंचाया है। उनके गुरु ने भी इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए कहा कि तृषा में शुरू से ही सीखने की ललक और मंच पर कुछ अलग करने का जुनून रहा है।

कक्षा 8 की छात्रा हैं तृषा तृषा फिलहाल पटना के नोट्रेडेम एकेडमी की कक्षा 8 की छात्रा हैं। इतनी कम उम्र में उन्होंने जिस तरह पढ़ाई और नृत्य के बीच संतुलन बनाया है, वह अन्य छात्रों के लिए एक उदाहरण बन गया है। स्कूल प्रबंधन और शिक्षकों ने भी उनकी इस उपलब्धि पर गर्व जताया है। तृषा के परिवार का भी इस सफलता में अहम योगदान रहा है। परिवार ने हमेशा उन्हें प्रोत्साहित किया और उनके सपनों को उड़ान देने में पूरा सहयोग दिया। यही वजह है कि तृषा आज इस मुकाम तक पहुंच पाई हैं।

अपनी कला से तृषा ने मुकाम हासिल किया।

अपनी कला से तृषा ने मुकाम हासिल किया।

राज्य में शास्त्रीय नृत्य के प्रति रुचि और बढ़ेगी तृषा का इस स्कॉलरशिप के लिए चयन होना बिहार के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। भारतनाट्यम जैसी शास्त्रीय नृत्य शैली में राज्य से इकलौती छात्रा का चयन होना इस बात का संकेत है कि बिहार में भी कला और संस्कृति के क्षेत्र में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। कला जगत से जुड़े लोगों का मानना है कि तृषा की सफलता से राज्य में शास्त्रीय नृत्य के प्रति रुचि और बढ़ेगी। इससे अन्य युवा कलाकारों को भी प्रेरणा मिलेगी और वे इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए उत्साहित होंगे।

नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा बनीं तृषा तृषा भट्टाचार्य की यह उपलब्धि केवल एक व्यक्तिगत सफलता नहीं है, बल्कि यह नई पीढ़ी के लिए एक प्रेरणादायक कहानी है। उन्होंने यह साबित कर दिया है कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदारी से की जाए, तो कोई भी सपना असंभव नहीं होता।

उनकी इस सफलता से यह संदेश जाता है कि छोटे शहरों और सीमित संसाधनों के बावजूद भी बड़े सपने पूरे किए जा सकते हैं। जरूरत है तो केवल लगन, अनुशासन और सही मार्गदर्शन की। आने वाले समय में तृषा और भी बड़ी ऊंचाइयों को छुएंगी, ऐसी उम्मीद की जा रही है।



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