कभी घर-परिवार में प्यार से गुल्लू कहकर पुकारे जाने वाले एक साधारण बच्चे को आज पूरा बिहार सम्राट चौधरी के नाम से जानता है। बिहार की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय सम्राट चौधरी अब राज्य के 24वें मुख्यमंत्री बन चुके हैं। पदभार संभालते ही उन्होंने प्रशासनिक बैठकों का सिलसिला शुरू कर दिया है। सरकार की प्राथमिकताओं पर तेजी से काम करने में जुट गए हैं। मुख्यमंत्री बनने से पहले सम्राट चौधरी ने दैनिक भास्कर को दिए एक इंटरव्यू में कहा था कि बिहार तेजी से बदल रहा है, विकास की नई तस्वीर दिख रही है। आने वाले 2 सालों में राज्य के हर हिस्से में चार्टर प्लेन नजर आएंगे। उनका यह बयान सुर्खियों में रहा था, क्योंकि इसमें नए बिहार की बड़ी तस्वीर पेश की गई थी। शपथ ग्रहण के बाद जब दैनिक भास्कर की टीम उनके पैतृक गांव लखनपुर पहुंची, तो वहां की जमीनी तस्वीर कुछ अलग कहानी कहती नजर आई। यह गांव मुंगेर जिले के तारापुर क्षेत्र में स्थित है, जहां से सम्राट चौधरी का राजनीतिक और पारिवारिक जुड़ाव रहा है। गांव में प्रवेश करते ही दो अलग-अलग तस्वीरें सामने आती हैं। एक हिस्सा ऐसा है, जहां पक्की सड़कें, बेहतर मकान, बिजली व्यवस्था और साफ-सफाई दिखाई देती है। वहीं दूसरी ओर वार्ड संख्या 7, 12 और आसपास के इलाकों में लोगों की शिकायतें खत्म होने का नाम नहीं लेतीं। यहां टूटी सड़कें, जाम नालियां, गंदगी, जलजमाव, पेयजल संकट और प्रधानमंत्री आवास जैसी योजनाओं से वंचित रहने की बातें खुलकर सामने आईं। 10 साल से सड़कों-नालियों की स्थिति बेकार स्थानीयों का कहना है कि करीब 10 साल से समस्याएं जस की तस बनी हुई है। बरसात के दिनों में हालात और खराब हो जाते हैं। सड़कें कीचड़ में बदल जाती है। नालियों का पानी घरों तक पहुंच जाता है। आने-जाने में भारी परेशानी होती है। कई परिवारों ने बताया कि अब भी उन्हें मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि जब राज्य के मुख्यमंत्री का पैतृक गांव ही बुनियादी समस्याओं से जूझ रहा है, तो बिहार के दूर-दराज के अन्य गांवों की स्थिति कैसी होगी? क्या विकास की रफ्तार गांव के हर मोहल्ले तक पहुंच पाई है, या अब भी कई इलाके इंतजार में हैं? दैनिक भास्कर की टीम ने जिला मुख्यालय से 5KM दूर का सफर तय कर लखनपुर पहुंचकर गांव की इन्हीं तस्वीरों को समझने की कोशिश की, जहां एक ओर सत्ता का शिखर है, तो दूसरी ओर जमीन पर बुनियादी जरूरतों का संघर्ष अब भी जारी है। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… मुस्लिम आबादी वाली नाली जाम, सड़कों पर पानी तारापुर मार्केट से होते हुए हम सबसे पहले लखनपुर गांव की मुख्य सड़क पर पहुंचे। इस दौरान हमने देखा वहां की सड़कें टूटी पड़ी हैं। आधे जगह पर पानी भरा है। नाले जाम हैं। कुछ घंटों की बारिश में इस इलाके के घरों में पानी भर जाता है। गांव के मेन रोड के ये हालात हैं, तो अंदर की स्थिति क्या होगी ये जानने के लिए हम लखनपुर गांव की गलियों में पहुंचे। सबसे पहले मुस्लिम आबादी वाला गांव है, वहां की स्थिति बहुत ही दयनीय है। इम्तियाज बस्ती के पास से गुजरने वाली एक नहर की ओर इशारा करते हुए बताते हैं, ‘इस नहर से कभी सिंचाई होती थी, गांव का पानी बाहर निकलता था। अब यही हमारे लिए मुसीबत बन गई है। इसमें इतना कचरा जमा है कि बारिश में पानी निकासी की जगह बस्ती में फैल जाता है।’ वे आगे बताते हैं, ‘आप पता कीजिए कि इस नहर को साफ करने के लिए हर साल कितना पैसा पास होता है। अखबारों में खबरें छपती हैं। एक मंत्री जी JCB लेकर आए थे। चार टोकरी कूड़ा निकाला, फोटो खिंचवाई और चले गए। फिर जांच वाले आए, ठेकेदार ने उनके सामने दो-चार लोगों को डांट लगाई, चिल्लाया और सब शांत हो गए। इसके बाद वो वहां से चले गए। 5 हजार आबादी, 700 घर लेकिन बराबर नहीं पहुंचा विकास लखनपुर गांव की ताजा आधिकारिक आबादी का आंकड़ा सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। 2011 जनगणना और स्थानीय अनुमानों के आधार पर गांव की आबादी करीब 5 हजार मानी जाती है। गांव में लगभग 700 घर बताए जाते हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार गांव बड़ा है, आबादी मिश्रित है और कई वार्डों में बसा हुआ है, लेकिन विकास की रफ्तार हर मोहल्ले तक समान रूप से नहीं पहुंची। महिलाएं बोलीं: सड़क बन जाए तो आधी परेशानी खत्म वार्ड संख्या-12 में रहने वाली शमिला खातून अपने घर के सामने जमा गंदगी दिखाते हुए कहती हैं, हमारे घर के तरफ जो नाली बनी है, वह पूरी तरह खराब हो चुकी है। उसमें कचरा जमा रहता है। पानी से ज्यादा गंदगी बहती है। सबसे बड़ी जरूरत है कि गांव की सड़क बनाई जाए, ताकि हमलोगों को चचरी पुल से होकर न जाना पड़े। वह बताती हैं कि पिछले 10-15 साल से इलाके की सड़कें ठीक नहीं हुईं। हमलोगों ने सम्राट चौधरी से उम्मीद लगा रखी है, लेकिन अभी कुछ बोल नहीं सकते। उम्मीद है कि कुछ अच्छा होगा। नाली बनी, लेकिन अब और ज्यादा गंदगी जमा होती है इसी वार्ड के रहने वाले मुस्तुफा ने एक साल पहले बनी नाली की तरफ इशारा करते हुए कहा, यह नाली इसलिए बनाई गई थी कि पानी निकल सके, लेकिन आज भी पानी नहीं निकलता। जो कचरा यहां फंसा है, उसे कभी साफ नहीं किया गया। कोई अधिकारी देखने तक नहीं आया। वे बताते हैं कि नाली बनने के बाद हालत और खराब हो गई है। अब यहां पहले से ज्यादा कचरा जमा होता है। मच्छर बढ़ गए हैं। घर के सामने बदबू रहती है। अभी गर्मी में यह हाल है, बारिश में तो घर से निकलना मुश्किल हो जाएगा। उनकी नाराजगी जनप्रतिनिधियों से भी है। मुस्तुफा ने आगे कहा, नेता लोग सिर्फ वोट मांगने आते हैं। जब समस्या बताते हैं तो कहते हैं कि खुद देखो, खुद हल निकालो। हालांकि बातचीत खत्म होते-होते वे उम्मीद की बात भी करते हैं। अगर सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री बनेंगे तो शायद गांव बदल जाए। यहां सारी सुविधाएं आएंगी। तीन-चार दिन तक नहीं आता पानी मोहम्मद रकिब ने गांव में पानी संकट को सबसे बड़ी परेशानी बताया। हमारे वार्ड में तीन-चार दिन तक सप्लाई पानी नहीं आता। घर का काम रुक जाता है। जिन घरों में समरसेबल है, वहां से पानी मांगकर काम चलाते हैं। वे कहते हैं कि खुले नाले और गंदगी के कारण मच्छरों की भरमार है। यहां रोजगार भी नहीं है। काम के लिए बाहर शहर जाना पड़ता है। अगर गांव में रोजगार मिलता, तो कोई अपना घर छोड़कर बाहर क्यों जाता? फिर वे सीधे सवाल करते हैं हमारे गांव से बिहार के बड़े नेता बने हैं, यह अच्छी बात है। लेकिन अगर अपने गांव के लिए कुछ नहीं करेंगे, तो कैसे चलेगा? सम्राट चौधरी चाहेंगे तभी यहां विकास होगा। 6 साल से आवास योजना का इंतजार गांव के उमर अफजल की परेशानी अलग है। वे प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभ से वंचित हैं। उन्होंने भास्कर को बताया, हमलोग छह साल से प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए आवेदन कर रहे हैं। हर साल फॉर्म भरते हैं, लेकिन आज तक लाभ नहीं मिला। वे बताते हैं कि पिछले आठ साल से किराए के मकान में रह रहे हैं। जमीन है, लेकिन मकान बनाने के लिए पैसा नहीं है। मैं वेल्डिंग का काम करता हूं। उसी से घर चलता है। पिताजी की मौत हो चुकी है, परिवार की जिम्मेदारी मेरे ऊपर है। उमर कहते हैं कि अगर गरीबों तक योजना का लाभ सही समय पर पहुंचे, तो उनकी जिंदगी बदल सकती है। सड़कें भी बनीं, लेकिन टिक नहीं पाईं बस्ती के लोगों ने सिर्फ नहर ही नहीं, सड़क को लेकर भी नाराजगी जताई। मोहम्मद सादिक ने कहा कि सड़क का पानी घरों में घुस जाता है। बच्चों को स्कूल जाने में खतरा रहता है। कई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। मोहम्मद शाहनवाज अंसारी ने गांव की एक अधूरी सड़क दिखाई। उन्होंने कहा कि सड़क निर्माण शुरू हुआ था, नाली खोदी गई, कुछ गिट्टी डाली गई, फिर काम रुक गया। अब वही रास्ता और खतरनाक हो गया है। महिलाएं बोलीं- योजनाओं का लाभ अधूरा मुस्लिम बस्ती की बुजुर्ग शाहजहां बेगम टूटी झोपड़ी के बाहर मिलीं। उन्होंने कहा कि बस एक छोटा नाला बन जाए, ताकि पानी निकल सके। अभी तो लोग खुद ही सफाई करते हैं। रोशन खातून ने बताया कि उन्हें उज्ज्वला योजना के तहत गैस सिलेंडर मिला, लेकिन प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ नहीं मिला। उनका घर जर्जर हालत में है। उन्होंने कहा कि बड़े लोगों को घर मिल गया, गरीबों को कुछ नहीं मिला। गांव का दूसरा हिस्सा- चमकता इलाका जब हम गांव के उस हिस्से में पहुंचे जहां सम्राट चौधरी का घर है, तो वहां का नजारा अलग था। पक्की सड़कें, साफ नालियां, व्यवस्थित 2-3 मंजिला मकान और बेहतर सुविधाएं नजर आईं। गांव में दो तस्वीरें साफ दिखती हैं लखनपुर गांव में घूमने पर साफ महसूस होता है कि यहां विकास एक समान नहीं हुआ है। कुछ इलाकों में पक्की सड़कें, बेहतर मकान, बिजली और साफ-सफाई है। वहीं कुछ हिस्सों में जलजमाव, कच्चे रास्ते, टूटे पुल, गंदगी और सरकारी योजनाओं की अधूरी पहुंच नजर आती है। स्थानीय लोग कहते हैं कि प्रभावशाली इलाकों में काम जल्दी होता है, जबकि कमजोर तबकों वाले वार्डों में योजनाएं धीमी पड़ जाती हैं। गांव वालों की नाराजगी से ज्यादा उम्मीद बड़ी है दिलचस्प बात यह है कि शिकायतों के बावजूद गांव वालों ने सम्राट चौधरी के खिलाफ तीखी नाराजगी नहीं दिखाई। ज्यादातर लोगों ने कहा कि उन्हें अब भी उम्मीद है कि सम्राट चौधरी गांव की हालत सुधारेंगे। एक ग्रामीण ने कहा, जब अपना आदमी बड़ा पद पर होता है, तो उम्मीद उसी से रहती है। बाहर वाले नेता से क्या उम्मीद करेंगे?
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