Shivpuri Professor Child Home Rape


क्राइम फाइल्स के पार्ट-1 में आपने पढ़ा कि 1 अक्टूबर 2016 को शिवपुरी के माधव बाल आश्रम से 15-16 साल की दो नाबालिग लड़कियां लापता हो गईं। आश्रम प्रबंधन की सूचना पर पुलिस ने गुमशुदगी दर्ज कर तुरंत तलाश शुरू की।

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कुछ ही घंटों में अशोकनगर से दोनों बरामद हुईं, लेकिन दोंनों सहमी सी नजर आईं। बाल कल्याण समिति (CWC) के निर्देश पर काउंसलिंग में चौंकाने वाले खुलासे हुए।

लड़कियों ने बताया कि रात के खाने में नशीला पदार्थ मिलाकर उन्हें सुला दिया जाता, फिर छेड़छाड़ और दुष्कर्म होता था। सुबह कपड़े अस्त-व्यस्त, शरीर में दर्द और रक्त स्त्राव के निशान मिलते थे, पर उन्हें कुछ याद नहीं रहता था। प्रशासन ने अन्य लड़कियों की काउंसलिंग भी शुरू की।

अब सवाल था कि दुराचार करने वाले कौन हैं? कितनी लड़कियों ने ये दर्द झेला? पढ़िए क्राइम फाइल्स के इस दूसरे हिस्से में…

जब अन्य लड़कियों की काउंसलिंग के लिए बुलाया गया, तो आश्रम की डायरेक्टर शैला अग्रवाल ने सड़क खराब होने और बच्चियों की तबीयत खराब होने का बहाना बनाकर इसे टाल दिया। शैला पर पुलिस को पहले ही संदेह था इसके बाद ये संदेह और गहरा हो गया। पुलिस ने तुरंत आश्रम में छापा मारा।

डर के साये में लड़कियां, शिकायत बॉक्स ने खोले राज

चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के शिकायत बॉक्स से मिली शिकायतों ने सच्चाई की परतें खोलनी शुरू कर दीं। एक शिकायत में 15 साल की लड़की के साथ अश्लील हरकतों के आरोप थे।

ग्वालियर से आई स्पेशलिस्ट काउंसलर टीम ने जब एक-एक लड़की से बात की, तो तस्वीर और भयावह होती चली गई। 16 नवंबर को 10 से 17 साल की 6 लड़कियों ने जो बयान दिए, उन्हें सुनकर काउंसलर्स भी सन्न रह गए। एक बच्ची ने डरते हुए कहा, ‘मैं जो भी बताऊंगी, वो बुआ तक पहुंच जाएगा और वो मुझे मारेगी।’

‘बाबा’ और ‘बुआ’ का खौफ, धमकी और हिंसा से डराते

कई बच्चियों ने बताया कि आश्रम में रहने वाले 77 वर्षीय रिटायर्ड प्रोफेसर के.एन. अग्रवाल, जिन्हें ‘बाबा’ कहा जाता था, लड़कियों को अपने कमरे में बुलाकर गलत हरकतें करते थे।

16 वर्षीय एक पीड़िता ने बताया कि बाबा मुझे छूता था, किस करता था और एक बार ताे उसने कमरे में ले जाकर मुंह बांधकर दुष्कर्म भी किया। उसने धमकी दी कि किसी को बताया तो अंजाम बुरा होगा।

एक अन्य बच्ची ने बताया कि सुबह उठने पर कपड़े खुले मिलते थे। रात में खाने में कुछ मिलाया जाता था, जिससे गहरी नींद आ जाती थी। शैला अग्रवाल, जिन्हें लड़कियां बुआ कहती थीं, उन पर भी गंभीर आरोप लगे।

मेडिकल रिपोर्ट ने की पुष्टि, मामला दर्ज

मेडिकल जांच में लड़कियों के साथ दुष्कर्म की पुष्टि हुई। इसके बाद सभी लड़कियों को तत्काल सरकारी हॉस्टल में शिफ्ट कर दिया गया। 17 नवंबर 2016 को शैला अग्रवाल और उसके पिता केएन अग्रवाल के खिलाफ पॉक्सो एक्ट और दुष्कर्म की धाराओं में मामला दर्ज किया गया।

आश्रम के एक नाबालिग क्लर्क पर भी आरोप लगे, जो घटना के बाद फरार हो गया।

फरारी, गिरफ्तारी और एक पुराना सच पुलिस कार्रवाई की भनक लगते ही केएन अग्रवाल फरार हो गया। उसका मोबाइल आखिरी बार पोहरी बस स्टैंड पर लोकेट हुआ, जिसके बाद बंद हो गया। पुलिस ने तीन टीमें बनाकर उसकी तलाश शुरू की।

दूसरी ओर, 30 नवंबर को शैला अग्रवाल को गिरफ्तार कर लिया गया। केएन अग्रवाल और नाबालिग क्लर्क को भी जल्द ही गिरफ्तार कर लिया।

बेटी और पिता को आजीवन कारावास, बाद में जमानत

करीब डेढ़ साल बाद, 7 मई 2018 को शिवपुरी की विशेष अदालत ने केएन अग्रवाल को अनाथ बच्चियों के साथ दुष्कर्म, मारपीट और धमकाने का दोषी पाया। साथ ही, उनकी बेटी और एडवोकेट शैला अग्रवाल को इस अपराध में सहयोगी मानते हुए दोनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

हालांकि, क्लर्क को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया। फैसले के खिलाफ शैला अग्रवाल और प्रोफेसर ने खुद को निर्दोष बताते हुए हाईकोर्ट में अपील दायर की, जिस पर अंतिम निर्णय अभी लंबित है।

इसी बीच, लगभग 7 वर्ष जेल में बिताने के बाद जनवरी 2024 में हाईकोर्ट ने उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए उम्र को आधार मानकर अंतिम फैसला आने तक सजा निलंबित कर दी और दोनों को जमानत दे दी।

क्राइम फाइल्स पार्ट-1 भी पढ़ें…

रात में सोती लड़कियां, सुबह कपड़े खुले मिलते

मध्य प्रदेश क्राइम फाइल्स में आज शिवपुरी के उस सनसनीखेज केस की कहानी, जिसने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया। एक बाल आश्रम से भागी दो लड़कियां जब पुलिस के सामने आईं तो एक खौफनाक सच उजागर हुआ। पढ़ें पूरी खबर…



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