अस्थाई परमिट के आधार पर इंश्योरेंस खारिज करना गलत:राज्य उपभोक्ता आयोग में बीमा कंपनी की दलील विफल, 75% राशि चुकाने का फैसला




राजस्थान राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, बेंच-जोधपुर ने वाहन दुर्घटना के एक मामले में बीमा कंपनी की अपील को खारिज कर दिया है। आयोग के अध्यक्ष जस्टिस देवेन्द्र कच्छवाहा, सदस्य (न्यायिक) सुरेन्द्र सिंह और सदस्य लियाकत अली की पीठ ने स्पष्ट किया कि यदि दुर्घटना के समय वाहन के पास वैध अस्थाई परमिट मौजूद है, तो परमिट उल्लंघन के आधार पर पूरा बीमा दावा खारिज नहीं किया जा सकता। राज्य आयोग ने जिला उपभोक्ता आयोग, जैसलमेर के उस निर्णय को पुष्ट किया है, जिसमें परिवादी को सर्वेयर रिपोर्ट की शुद्ध क्षति की 75 प्रतिशत राशि ब्याज सहित अदा करने का आदेश दिया गया था। अजमेर में हुई थी दुर्घटना, कंपनी ने गिनाईं खामियां परिवाद के अनुसार- जैसलमेर के इंद्रा कॉलोनी निवासी रणवीर सिंह की बस 18 नवंबर 2020 की रात करीब 12:30 बजे अजमेर जिले के मंगलियावास थाना क्षेत्र में केसरपुरा पुलिया के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। बस का बीमा यूनाईटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड से 4 मार्च 2020 से 3 मार्च 2021 तक के लिए वैध था। हादसे के बाद मंगलियावास थाने में एफआईआर दर्ज करवाई गई। परिवादी ने अधिकृत सर्विस सेंटर वीर प्रभु मार्केटिंग लिमिटेड, जोधपुर से रिपेयरिंग का 15 लाख 78 हजार 330 रुपए का एस्टिमेट बनवाया और बस की मरम्मत पर कुल 11 लाख 45 हजार 665 रुपये खर्च किए। इसके बाद भी बीमा कंपनी ने यह कहते हुए दावा खारिज कर दिया कि बस का स्थायी परमिट केवल जैसलमेर से बाड़मेर (वाया डांगरी) रूट का था और दुर्घटना के समय बस बिना वैध रूट परमिट के जयपुर से जैसलमेर के लिए चलाई जा रही थी। सूचना में 27 दिन की देरी भी काम नहीं आई राज्य आयोग में अपीलार्थी बीमा कंपनी के वकीलों ने तर्क दिया कि सूचना 27 दिन की देरी (15 दिसंबर 2020) से दी गई और बस में क्षमता से अधिक सवारियां भरी थीं। कंपनी ने अपने पक्ष में सुप्रीम कोर्ट के दो न्यायिक दृष्टांत ‘नेशनल इंश्योरेंस कंपनी बनाम छल्ला भरथम्मा’ और ‘युनाईटेड इण्डिया इंश्योरेंस बनाम सुशील कुमार गोदारा’ पेश किए। हालांकि, आयोग ने इन नज़ीरों को इस मामले से भिन्न बताया। आयोग ने कहा कि छल्ला भरथम्मा केस में वाहन बिना किसी परमिट के था, जबकि वर्तमान मामले में परिवादी ने 18 नवंबर 2020 के लिए जयपुर से जैसलमेर का एक दिन का अस्थाई परमिट रसीद कटवाकर लिया हुआ था। सूचना में देरी पर आयोग ने स्पष्ट किया कि चूंकि पुलिस थाने में रिपोर्ट ‘अविलम्ब’ दर्ज करवा दी गई थी, इसलिए बीमा कंपनी को सूचना देने में हुए विलंब का कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ता है। जिला आयोग का आदेश बरकरार, 9% ब्याज सहित देने होंगे 5,98,500 रुपए राज्य आयोग ने जिला उपभोक्ता आयोग, जैसलमेर द्वारा 28 मार्च 2024 को पारित निर्णय को सही ठहराया। आदेश के अनुसार, बीमा कंपनी को सर्वेयर द्वारा आंकी गई शुद्ध क्षति 7 लाख 98 हजार रुपये की 75 प्रतिशत राशि यानी 5 लाख 98 हजार 500 रुपये का भुगतान करना होगा। यह राशि परिवाद प्रस्तुत करने की तारीख 24 जुलाई 2023 से भुगतान करने की तारीख तक 9 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज के साथ देय होगी। इसके अतिरिक्त, परिवादी को हुई मानसिक, शारीरिक और आर्थिक क्षति के एवज में 10 हजार रुपये तथा परिवाद व्यय के रूप में 5 हजार रुपये भी अदा करने होंगे। आयोग ने निर्देश दिया कि इस आदेश की पालना 45 दिनों के भीतर की जाए।



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