अनूपपुर जिले के कोतमा निवासी राम भुवन तिवारी की इलाज के दौरान हुई मौत और अस्पताल प्रबंधन पर लगे गंभीर लापरवाही के आरोपों की अब मजिस्ट्रियल जांच होगी। कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी हर्षल पंचोली ने गुरुवार शाम को जांच के आदेश दिए। इसके तहत, आगामी 18 अप्रैल को साक्ष्य और बयान दर्ज करने की तिथि निर्धारित की गई है। इस घटना से संबंधित कोई भी व्यक्ति, जिसके पास लिखित साक्ष्य, दस्तावेजी प्रमाण या जानकारी है, वह शनिवार को एसडीएम न्यायालय कोतमा में उपस्थित होकर अपने कथन दर्ज करा सकता है। यह जांच राम भुवन तिवारी के परिजनों और मीडिया द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद शुरू की गई है। दरअसल, 14 मार्च को राजकुमार तिवारी अपने पिता राम भुवन तिवारी को सीने में दर्द की शिकायत होने पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कोतमा लेकर पहुंचे थे। आरोप है कि ड्यूटी डॉक्टर ने मरीज की गंभीरता को नजरअंदाज करते हुए उसे सामान्य गैस की समस्या बताकर दवा दी और घर भेज दिया। रात करीब 3:30 बजे जब राम भुवन तिवारी की हालत बिगड़ी और परिजन दोबारा अस्पताल पहुंचे, तो डॉक्टर रेस्ट रूम में सो रहे थे। परिजनों को लगभग आधे घंटे तक दरवाजा खटखटाना पड़ा। इस देरी के बीच तड़पते हुए राम भुवन तिवारी ने दम तोड़ दिया। 26 किमी देर रहते हैं डॉक्टर जांच में यह भी सामने आया है कि ड्यूटी डॉक्टर केएल दीवान मुख्यालय के बजाय 26 किलोमीटर दूर बिजुरी में निवास करते हैं, जिससे आपातकालीन सेवाओं पर असर पड़ता है। कलेक्टर हर्षल पंचोली ने अनुविभागीय दण्डाधिकारी (एसडीएम) कोतमा को विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं।
Source link