हरदा जिले के टिमरनी ब्लॉक स्थित वन ग्राम रातामाटी, बिटिया और बोबदा के ग्रामीणों व जयस संगठन ने वन विभाग द्वारा किसानों के खेतों में खोदे जा रहे सीपीटी (कंटूर ट्रेंच) गड्ढों के विरोध में सोमवार को कलेक्टर के नाम नायब तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा। ग्रामीणों ने विभाग पर नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए खुदाई तत्काल रोकने की मांग की है। साथ ही 3 प्रमुख मांगें पूरी करने के लिए 7 दिन का अल्टीमेटम दिया है, जिसके बाद पुरजोर विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दी गई है। 1980-81 के बंदोबस्त की अनदेखी का आरोप
जय आदिवासी युवा शक्ति संगठन (जयस) के जिला अध्यक्ष सत्यनारायण सुचार और ग्रामीणों ने बताया कि वन विभाग लगातार नियम और संविधान का उल्लंघन कर जबरन सीपीटी गड्ढे खोद रहा है। ये खुदाई सीधे किसानों के खेतों में की जा रही है, जिससे उन्हें भारी परेशानी हो रही है। ग्रामीणों के मुताबिक, वर्ष 1980-81 के बंदोबस्त के दौरान उनके पूर्वजों और तत्कालीन अधिकारियों ने गांव की सीमा तय की थी। गांव की पहचान और स्पष्ट सीमा के लिए ‘चांदा’ और ‘गिरी’ का निर्माण किया गया था, जिसे नजरअंदाज किया जा रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन के सामने रखीं 3 प्रमुख मांगें 7 दिन में मांगें पूरी नहीं होने पर प्रदर्शन की चेतावनी
ज्ञापन सौंपने पहुंचे रातामाटी, बिटिया और बोबदा गांव के समस्त ग्रामवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि 7 दिनों के भीतर उनकी तीनों मांगें नहीं मानी जाती हैं, तो आदिवासी समाज के लोग जयस संगठन के साथ मिलकर पुरजोर विरोध प्रदर्शन करेंगे। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि इस विरोध प्रदर्शन की संपूर्ण जिम्मेदारी हरदा जिला प्रशासन और वन विभाग की होगी।
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