'कुछ बनना है तो RAS ही बनना है':सरपंच के छोटे भाई की 662वीं रैंक, बोले- रैंक से संतुष्ट, सफर अभी जारी




टोंक जिले के आंवा गांव के दिव्य उर्फ मनू भारद्वाज ने आरएएस के फाइनल परीक्षा परिणाम में उसने पहले प्रयास में ही 622वीं रैंक हासिल की है। दिव्य भारद्वाज ने भास्कर से बातचीत में बताया कि उनका लक्ष्य शुरू से ही आरएएस बनना था। मैंने तय कर लिया था कि अगर कुछ बनना है तो आरएएस ही बनना है। उसी लक्ष्य को सामने रखकर तैयारी की और लगातार मेहनत करता रहा। दिव्य के पिता देवेंद्र भारद्वाज और माता गायत्री शर्मा दोनों ही शिक्षक हैं। दिव्य ने कहा- मुझे परिवार में हमेशा पढ़ाई का माहौल मिला। माता-पिता के साथ-साथ ताऊजी मुख्यमंत्री के पूर्व सलाहकार महेंद्र भारद्वाज, आंवा सरपंच बड़े भाई दिव्यांश भारद्वाज, इंजीनियर मुदित भारद्वाज, व्यवसायी पवन भारद्वाज सहित पूरे परिवार का मार्गदर्शन और समर्थन मेरी सबसे बड़ी ताकत रही। इन्होंने हमेशा प्रेरित किया कि मैं अधिकारी बनकर समाज और परिवार का नाम रोशन करूं। पहले प्रयास में सफलता मिली दिव्य ने अपनी सफलता का श्रेय अपने भारद्वाज परिवार और माता-पिता के अलावा एकाग्रता, नियमित अध्ययन और सकारात्मक माहौल को दिया। कहा कि कठिन समय में भी उसने धैर्य नहीं खोया और अपने लक्ष्य पर फोकस बनाए रखा। पहले प्रयास में ही यह सफलता मिली। हालांकि उसने अपने घर के अलावा जयपुर कोटा में भी इसको लेकर तैयारी की। रैंक से संतुष्टि, लेकिन लक्ष्य अभी बाकी अपनी रैंक को लेकर दिव्य ने संतोष जताया, लेकिन साथ ही और बेहतर करने की इच्छा भी जाहिर की। उसने कहा, यह रैंक मेरे लिए संतोषजनक है, लेकिन मैं इससे भी बेहतर प्रदर्शन करना चाहता हूं। आगे और मेहनत करूंगा ताकि परिवार और क्षेत्र का नाम और ऊंचा कर सकूं। दिव्य की इस उपलब्धि से आंवा गांव सहित पूरे क्षेत्र में गर्व का माहौल है। ग्रामीणों और परिजनों ने मिठाई बांटकर खुशी जाहिर की और उज्ज्वल भविष्य की कामना की।



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