राजस्थान हाईकोर्ट जोधपुर मुख्यपीठ की खंडपीठ ने चबाने वाले तंबाकू (जर्दा) और गुटखा पैकिंग मशीनों पर लागू नए एक्साइज ड्यूटी नियमों के मामले में एक फर्म को बड़ी राहत दी। कोर्ट ने केंद्र सरकार और संबंधित विभागों को नोटिस जारी करते हुए निर्देश दिया है कि सीसीटीवी कैमरे लगाने की शर्त के साथ याचिकाकर्ता के खिलाफ फिलहाल कोई भी दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। यह याचिका जोधपुर के मंडोर इंडस्ट्रियल एरिया स्थित फर्म ‘त्रिमूर्ति लीव्स’ की ओर से इसके भागीदार विनायक के. सावंत के माध्यम से दायर की गई है। इसमें केंद्र सरकार द्वारा 31 दिसंबर 2025 को जारी अधिसूचना और उसके तहत बनाए गए नियमों के नियम 4, 5, 10 और 16 को विशेष रूप से चुनौती दी गई है। मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई 2026 को निर्धारित की गई है। काल्पनिक क्षमता बनाम वास्तविक उत्पादन याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता शरद कोठारी, मयंक तापड़िया व अन्य ने दलील दी कि अधिनियम की धारा 3A के तहत उत्पाद शुल्क केवल वास्तविक उत्पादन को प्रभावित करने वाले कारकों पर विचार करने के बाद ही निर्धारित किया जा सकता है। नए नियमों में मशीन की वास्तविक उत्पादन क्षमता के बजाय ‘अनुमानित अधिकतम उत्पादन क्षमता’ के आधार पर ड्यूटी लगाई गई है। इस नई व्यवस्था में लेबर की कमी, मशीन खराब होने, बिजली गुल होने और कच्चे माल की कमी जैसे व्यावहारिक और तकनीकी कारणों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया है। सीसीटीवी प्रावधान और बिजली कटौती की आशंका याचिका में नियम 16 के तहत सीसीटीवी इंस्टॉलेशन की अनिवार्यता पर भी सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ता का तर्क है कि बिजली गुल होने की स्थिति में सीसीटीवी कैमरे काम करना बंद कर देते हैं। ऐसे में आबकारी विभाग के अधिकारी उस अवधि को ‘उत्पादन अवधि’ मान सकते हैं, जिससे निर्माताओं को बेवजह दंडात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि स्पष्ट दिशानिर्देशों के अभाव में यह प्रावधान निर्माताओं के लिए भविष्य में प्रतिकूल परिणाम पैदा कर सकता है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की नजीर का संदर्भ सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकीलों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की खंडपीठ द्वारा ‘मैसर्स वेल फ्रैग्रेंस प्राइवेट लिमिटेड बनाम भारत संघ’ मामले में 4 फरवरी को दिए गए अंतरिम आदेश का भी हवाला दिया। उस मामले में भी इन्हीं नियमों के नियम 16 और 22(3) को चुनौती दी गई थी। राजस्थान हाईकोर्ट की खंडपीठ ने प्रथमदृष्टया याचिकाकर्ता के पक्ष को स्वीकार्य माना है। कोर्ट ने आदेश दिया कि फिलहाल नियम 16 की अनुपालना (सीसीटीवी लगाने) के अधीन याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई कठोर कदम नहीं उठाया जाएगा। केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल भरत व्यास ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से और अन्य प्रतिवादियों की ओर से अधिवक्ता कुलदीप वैष्णव ने नोटिस स्वीकार किए हैं।
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