चंडीगढ़ के सेक्टर-17 में एक असुरक्षित घोषित इमारत में शराब का ठेका चलने का मामला अब पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट पहुंच गया है। मामले में सख्ती दिखाते हुए हाईकोर्ट ने प्रशासन से जवाब तलब किया है। चीफ जस्टिस ने यूटी के चीफ सेक्रेटरी से शपथ पत्र मांगते हुए पूछा है कि आखिर अनसेफ बिल्डिंग में ठेके का लाइसेंस कैसे जारी कर दिया गया। जानकारी के अनुसार, सेक्टर-17ए स्थित इस बिल्डिंग को पहले ही असुरक्षित घोषित किया जा चुका है और इसे गिराने के आदेश भी दिए जा चुके हैं। इसके बावजूद उसी इमारत में शराब का ठेका संचालित हो रहा है, जिससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। कमर्शियल की अनुमति देना लापरवाही पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने इस मामले पर कड़ा रुख अपनाया। कोर्ट ने स्पष्ट तौर पर कहा कि जब किसी इमारत को प्रशासन खुद “अनसेफ” और खतरनाक घोषित कर चुका है, तो उसी जगह पर कमर्शियल गतिविधि की अनुमति देना गंभीर लापरवाही है। कोर्ट ने प्रशासन से सीधे सवाल किया कि जिस बिल्डिंग को गिराने के आदेश पहले ही जारी हो चुके हैं, वहां शराब का ठेका चलाने की इजाजत किस आधार पर दी गई। क्या संबंधित विभागों ने बिल्डिंग की मौजूदा हालत का निरीक्षण किया था या बिना जांच के ही लाइसेंस जारी कर दिया गया? इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी पूछा कि अगर इस जर्जर इमारत में कोई हादसा हो जाता है। जैसे बिल्डिंग का हिस्सा गिरना, लोगों के घायल होना या जानमाल का नुकसान—तो उसकी जिम्मेदारी कौन तय करेगा। क्या इसके लिए एस्टेट ऑफिस, एसडीएम ऑफिस या लाइसेंस जारी करने वाला विभाग जिम्मेदार होगा? जर्जर बिल्डिंग में रोज लग रही भीड़ बताया जा रहा है कि इस ठेके पर रोज बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं, जिससे जर्जर इमारत पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है। संबंधित विभागों और तकनीकी एजेंसियों की रिपोर्ट में इस बिल्डिंग को बेहद कमजोर और कभी भी गिरने की स्थिति में बताया गया है। दीवारों में दरारें, कमजोर छत और पुरानी संरचना इसे और खतरनाक बना रही है। नियमों के अनुसार ऐसी असुरक्षित इमारत को तुरंत खाली कर सील किया जाना चाहिए, ताकि किसी तरह का जोखिम न रहे। इसके बावजूद यहां न सिर्फ शराब का ठेका चल रहा है, बल्कि अहाता भी संचालित हो रहा है, जहां लोग बैठकर सेवन कर रहे हैं। इससे हर समय किसी बड़े हादसे का खतरा बना हुआ है, लेकिन जिम्मेदार विभाग अब तक ठोस कार्रवाई नहीं कर पाए हैं। गौरतलब है कि सेक्टर-17 में पहले भी दो इमारतें गिर चुकी हैं, लेकिन इसके बावजूद प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। जिस इमारत में ठेका चल रहा है, वह एस्टेट ऑफिस से करीब 300 मीटर की दूरी पर ही स्थित है। नोटिस के बावजूद जारी गतिविधियां एसडीएम ऑफिस ने अहाते के दुरुपयोग को लेकर नोटिस तो जारी कर दिया, लेकिन यह अहम पहलू नजरअंदाज कर दिया गया कि पूरी इमारत ही असुरक्षित घोषित है। ऐसे में नियमों के अनुसार वहां किसी भी तरह की गतिविधि चाहे ठेका हो या अहाता पूरी तरह बंद होनी चाहिए थी। इससे साफ होता है कि कार्रवाई अधूरी और सतही रही। आरटीआई एक्टिविस्ट आरके गर्ग का कहना है कि प्रशासन एक तरफ शहर की जर्जर इमारतों का सर्वे कराने और उन्हें हटाने की बात करता है, लेकिन जमीनी स्तर पर सख्ती नहीं दिखती। उन्होंने मांग की है कि ऐसी इमारतों को तुरंत खाली कराकर सील किया जाए और जरूरत पड़ने पर गिराया जाए, ताकि लोगों की जान जोखिम में न पड़े।
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