जिले के रहिका, कलुआही, खजौली और राजनगर प्रखंडों में जुड़ शीतल पर्व के अवसर पर ईंट-मिट्टी से प्रहार करने की पुरानी परंपरा बुधवार को निभाई गई। यह परंपरागत ‘खेल’ सुबह शुरू हुआ और सूर्यास्त तक जारी रहने की संभावना है। इस परंपरा के तहत लोग एक-दूसरे पर मिट्टी और ईंट के टुकड़ों से हमला करते हैं। स्थानीय मान्यता है कि इस दौरान लगने वाली चोटें स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होती हैं। यह परंपरा करीब 200 वर्षों से भी अधिक पुरानी बताई जाती है। बताया जाता है कि इस ‘खेल’ में मुख्य रूप से पूर्वी क्षेत्र के लोग पश्चिमी क्षेत्र के लोगों पर प्रहार करते हैं। हालांकि, इसके दौरान कई बार लोग घायल भी हो जाते हैं। इसे देखते हुए प्रशासन हर साल इस परंपरा को रोकने का प्रयास करता है। बुधवार को भी घुड़सवार बल के साथ रहिका, कलुआही, राजनगर और खजौली थानों की पुलिस तैनात की गई थी। बावजूद इसके, स्थानीय लोग परंपरा का पालन करते नजर आए। घटना के दौरान घायल हुए लोगों को प्रशासन की निगरानी में इलाज के लिए भेजा जा रहा है। उल्लेखनीय है कि पहले इस खेल में भाले और बरछी जैसे खतरनाक हथियारों का भी उपयोग किया जाता था, जिससे कई गंभीर घटनाएं हो चुकी हैं। प्रशासन ने समय के साथ इस पर नियंत्रण के प्रयास किए हैं। नाजीरपुर, बहरवन, बेलाही, मधेपुर, रसीदपुर, सीबीपत्ती, बेल्हबार, डोकहर, हरिपुर और हरिपुर डिग्टोल सहित दर्जनों गांवों के लोग इस परंपरा में शामिल होते हैं। भारी पुलिस बल की तैनाती के बावजूद यह परंपरा आज भी जारी है।
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