डंपर-बोलेरो की भिड़ंत, 3 बाराती जिंदा जले:5 गंभीर, ​घायलों की स्थिति नाजुक, जयपुर रेफर




राजगढ़-पिलानी नेशनल हाईवे 709 पर गुरुवार रात करीब 10 बजे एक भीषण सड़क हादसे में तीन लोगों की जिंदा जलने से दर्दनाक मौत हो गई। हादसा इतना भयावह था कि भिड़ंत के तुरंत बाद बोलेरो और डंपर दोनों आग का गोला बन गए। घटना के समय बोलेरो में सवार युवक हनुमानगढ़ के मनदपुरा से पिलानी एक बारात में शामिल होने जा रहे थे, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। ​प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, रोड़ी से भरा डंपर राजगढ़ की ओर जा रहा था, तभी सामने से आ रही बोलेरो से उसकी सीधी टक्कर हो गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि धमाके के साथ दोनों वाहनों में भीषण आग लग गई। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया, जिससे बोलेरो में सवार तीन लोगों को बाहर निकलने तक का मौका नहीं मिला और वे वाहन के भीतर ही जिंदा जल गए। ​हादसे के बाद हाईवे पर चीख-पुकार मच गई और लंबा जाम लग गया। सूचना पर हमीरवास थानाधिकारी रायसिंह सुथार पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और राहत कार्य शुरू किया। ​घायलों की स्थिति नाजुक, जयपुर रेफर ​पुलिस ने मशक्कत के बाद पांच युवकों को धधकती गाड़ी से बाहर निकाला, जो 50 प्रतिशत से अधिक झुलस चुके हैं। उन्हें तत्काल पिलानी के बिड़ला अस्पताल ले जाया गया, जहां से गंभीर हालत के चलते उन्हें झुंझुनूं के BDK अस्पताल और फिर वहां से जयपुर रेफर कर दिया गया है। ​ये हुए घायल 45 मिनट की देरी से पहुंची एम्बुलेंस घटनास्थल पिलानी के करीब था, फिर भी दमकल को पहुंचने में 45 मिनट लग गए। यदि समय पर आग बुझाई जाती, तो शायद तीन जानें बचाई जा सकती थीं। नियमों के मुताबिक टोल प्लाजा पर आपातकालीन स्थिति के लिए दमकल और त्वरित चिकित्सा सुविधा होनी चाहिए, लेकिन टोल के पास हादसा होने के बावजूद वहां ऐसी कोई व्यवस्था नहीं मिली। हाईवे के किनारों पर उगी घनी झाड़ियों और जंगली पौधों के कारण मोड़ पर सामने से आने वाला वाहन दिखाई नहीं देता। यह इस मार्ग पर दुर्घटनाओं का सबसे बड़ा कारण बनकर उभरा है। ​डेथ जोन बनता NH-709: एक साल में 8 मौतें ​आंकड़े डराने वाले हैं। पिछले महज एक साल में इस 20 किलोमीटर के दायरे में 8 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। विडंबना यह है कि थिरपाली के पास इसी एक ही स्पॉट पर अब तक तीन लोग काल कवलित हो चुके हैं, फिर भी नेशनल हाईवे अथॉरिटी ने सुरक्षा के कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किए हैं। ​शिनाख्त की चुनौती ​थानाधिकारी रायसिंह सुथार ने बताया कि आग इतनी भीषण थी कि मृतकों के शरीर पूरी तरह कोयला बन चुके हैं, जिससे उनकी पहचान करना फिलहाल मुश्किल हो रहा है। शवों को चूरू जिला अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया गया है।



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