इंदौर के प्रतिष्ठित डेली कॉलेज में जारी गतिरोध अब एक आर-पार की जंग में तब्दील हो गया है। हालिया घटनाक्रम में डेली कॉलेज सोसायटी ने संदीप पारिख और उनके समर्थकों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सोसायटी ने विरोध पक्ष के दावों को सिरे से खारिज करते हुए इसे एक ‘भ्रामक और दुर्भावनापूर्ण अभियान’ करार दिया है। मैनेजमेंट ने दो टूक शब्दों में स्पष्ट कर दिया है कि एफआईआर वापस नहीं ली जाएगी, क्योंकि यह मामला संस्था की गरिमा और महिला शिक्षकों के सम्मान से जुड़ा है। स्कूल की छवि बिगाड़ने के आरोप सोसायटी द्वारा जारी बयान में एफआईआर नंबर 0038/2026 का हवाला देते हुए बताया गया कि आरोपियों पर फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट्स के जरिए स्कूल की छवि बिगाड़ने और महिला स्टाफ के आपत्तिजनक चित्रण जैसे गंभीर आरोप हैं। न्यायालय द्वारा अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने को सोसायटी ने अपने पक्ष की सत्यता का प्रमाण बताया है। मैनेजमेंट का तर्क है कि यह कानूनी कार्रवाई किसी प्रतिशोध के कारण नहीं, बल्कि संस्थागत अनुशासन बनाए रखने के लिए की गई है। विरोध प्रदर्शनों पर सवाल उठाते हुए सोसायटी ने कहा कि स्कूल परिसर में बिना अनुमति के भीड़ जुटाना बच्चों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है। मैनेजमेंट के अनुसार, यह केवल 20-25 लोगों का एक सीमित गुट है, जबकि 300 से अधिक ODA सदस्यों ने लिखित में शिकायत दर्ज कराकर संदीप पारिख के नेतृत्व वाले इस विरोध से खुद को पूरी तरह अलग कर लिया है। मतदान के अधिकार छीनने के आरोप निराधार संविधान संशोधन के विवाद पर स्थिति स्पष्ट करते हुए सोसायटी ने बताया कि बायलॉज में किए गए बदलाव पूरी तरह वैध और संस्था के हित में हैं। नए संशोधनों के तहत ODA के बोर्ड प्रतिनिधित्व को 2 से बढ़ाकर 3 कर दिया गया है, जो एसोसिएशन के प्रभाव को बढ़ाता है न कि कम करता है। सोसायटी ने उन दावों को निराधार बताया जिसमें कहा गया था कि सदस्यों के मतदान के अधिकार छीने जा रहे हैं। मैनेजमेंट ने यह भी स्पष्ट किया कि एजीएम बुलाने और चुनाव प्रक्रिया का निर्धारण करना बोर्ड का वैधानिक अधिकार है।
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