बालाघाट जिले में बेनामी संपत्ति और आदिवासियों की जमीन की अवैध खरीद-फरोख्त को लेकर आयकर विभाग की कार्रवाई शनिवार को भी जारी रही। भोपाल और जबलपुर से आई टीमों ने वारासिवनी क्षेत्र के एक आदिवासी युवक और उससे जुड़े प्रॉपर्टी ब्रोकरों के ठिकानों पर दबिश देकर दस्तावेजों की जांच की। आदिवासी को मोहरा बनाकर करोड़ों के निवेश का संदेह जानकारी के अनुसार, वारासिवनी निवासी गणेश नामक आदिवासी के नाम पर करोड़ों की जमीन खरीदी गई है। आरोप है कि जिले के रसूखदार प्रॉपर्टी ब्रोकरों ने भारी निवेश किया है और आदिवासी युवक को केवल एक मोहरे के रूप में इस्तेमाल किया है। आयकर विभाग को इन संपत्तियों के लेनदेन में भारी वित्तीय अनियमितताओं की सूचना मिली थी। आयकर रिटर्न दाखिल न होने पर कार्रवाई जांच का मुख्य आधार स्टाम्प ड्यूटी और पैन कार्ड के विवरण हैं। नियमों के अनुसार, एक लाख रुपए से अधिक की स्टाम्प ड्यूटी पर आयकर रिटर्न की जानकारी देना अनिवार्य है। करोड़ों के इस सौदे में रिटर्न दाखिल न होने के कारण आयकर विभाग ने इसे संदिग्ध माना और शुक्रवार से ही जिले में मोर्चा संभाल लिया। बंद कमरे में प्रॉपर्टी ब्रोकरों से पूछताछ शनिवार को आयकर विभाग के अधिकारियों ने गणेश और इस मामले से जुड़े कई प्रॉपर्टी ब्रोकरों से बंद कमरे में लंबी पूछताछ की। टीम ने जमीन के सौदों से संबंधित कई अहम दस्तावेज जब्त किए हैं।
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