विदिशा जिले के ग्यारसपुर क्षेत्र के ग्राम मोहनपुर में दो नाबालिग बालिकाओं का बाल विवाह रुकवाया गया। प्रशासन और एक सामाजिक संगठन की टीम ने शुक्रवार को सूचना मिलने पर कार्रवाई की। सूचना मिलते ही सोशल वेलफेयर ऑर्गेनाइजेशन और महिला एवं बाल विकास विभाग की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची। टीम ने बालिकाओं के दस्तावेजों की जांच की, जिसमें पता चला कि एक बालिका की उम्र 14 वर्ष और दूसरी की 17 वर्ष थी। दोनों ही कानूनी विवाह आयु से कम थीं। शुरुआत में परिजनों ने परंपरा का हवाला देते हुए शादी कराने पर जोर दिया। इस दौरान माहौल तनावपूर्ण हो गया और रिश्तेदारों ने टीम पर दबाव बनाने की कोशिश की। जनप्रतिनिधियों के माध्यम से भी दबाव बनाने का प्रयास किया गया। समझाइश पर मान गए परिजन
हालांकि, टीम अपने कर्तव्य पर अडिग रही। टीम ने परिजनों को स्पष्ट रूप से समझाया कि 18 वर्ष से कम उम्र में बालिका का विवाह कराना कानूनन अपराध है और इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। लगातार समझाइश, धैर्य और सख्ती के बाद आखिरकार परिजन बाल विवाह टालने पर सहमत हुए। मौके पर पंचनामा तैयार किया गया और परिजनों से लिखित आश्वासन लिया गया कि बच्चियों की शादी बालिग होने के बाद ही की जाएगी। इस कार्रवाई में जिला प्रभारी दीपा शर्मा, लाडो अभियान प्रभारी मुकेश ताम्रकार, मोनू सेन, सुपरवाइजर प्रतिज्ञा चौरसिया और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की सराहनीय भूमिका रही। जिला प्रशासन ने लोगों से अपील की कि परंपरा के नाम पर कानून और बच्चों के भविष्य से समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। प्रशासन की इस सजगता ने दो बच्चियों का भविष्य सुरक्षित किया है।
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