संगरूर में गेहूं खरीद की धीमी गति के विरोध में किसानों ने डीसी कार्यालय के सामने धरना प्रदर्शन किया। किसानों का आरोप है कि मंडियों में बड़ी मात्रा में गेहूं पड़ा है, लेकिन उसकी खरीद नहीं हो रही है, जिससे उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जिले की अनाज मंडियों में अब तक 1 लाख 07 हजार 605 मीट्रिक टन (एमटी) गेहूं की आवक हुई है। इसमें से केवल 11 हजार एमटी गेहूं की ही खरीद हो पाई है। लगभग 96 हजार 605 एमटी गेहूं की खरीद अभी बाकी है, जिसके चलते किसान कई दिनों से मंडियों में अपनी फसल की रखवाली कर रहे हैं। भारतीय किसान यूनियन एकता उगराहां (जिला संगरूर) ने जिला प्रधान अमरीक सिंह और जिला महासचिव दरबारा सिंह के नेतृत्व में यह धरना प्रदर्शन किया। किसानों ने 3 घंटे तक किया धरना प्रदर्शन दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक चले इस धरने के कारण डीसी दफ्तर रोड पर आवाजाही बाधित रही, जिससे आम लोगों को भी असुविधा हुई। धरने को संबोधित करते हुए प्रांतीय प्रधान जोगिंदर सिंह उगराहां ने केंद्र और पंजाब सरकार पर गेहूं खरीद से बचने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकारें कमजोर दाना, अधिक नमी और टूट-फूट का बहाना बना रही हैं। किसानों ने बताया कि हाल ही में हुई ओलावृष्टि और बेमौसम बारिश के कारण गेहूं का दाना कुछ कमजोर हो गया है, जिससे किसानों को प्रति एकड़ कम से कम छह क्विंटल तक का नुकसान हुआ है। किसानों ने सरकार की मंशा पर उठाए सवाल किसान नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार की मंशा सीड बिल, बिजली संशोधन 2025, लेबर कोड, फ्री ट्रेड डील और सार्वजनिक संस्थानों के निजीकरण को लागू करने की है। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि विदेशों से आने वाले अनाज पर भारत शून्य तक टैक्स लगाएगा, जबकि भारत से बाहर जाने वाली फसलों पर 18 से 35 प्रतिशत तक टैक्स लगाया जाएगा। इससे भारतीय किसानों को अमेरिकी किसानों से प्रतिस्पर्धा करनी पड़ेगी, जिन्हें सरकार की ओर से एक लाख अमेरिकी डॉलर तक की सब्सिडी मिलती है। किसान नेताओं ने सरकार को सख्त चेतावनी दी कि वे हर हाल में गेहूं की फसल की खरीद सुनिश्चित करवाएंगे। इस अवसर पर बहाल सिंह ढींडसा, अमनदीप सिंह सहित अन्य किसान नेता भी मौजूद थे।
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