सुसाइड नहीं ये ऑनर किलिंग थी:अपना ही निकला हत्यारा, पहले केबल से बेरहमी से पीटा, फिर इज्जत के नाम पर हत्या, पार्ट-2




राजस्थान क्राइम फाइल्स के पार्ट–1 में आपने पढ़ा सीकर के अलोदा गांव का छह साल पुराना केस। 19 साल की प्रेम और 38 साल का गणपत अचानक लापता हो गए। पुलिस जांच के दौरान दोनों के शव मिले। सुराग के नाम पर था एक सीसीटीवी फुटेज। सीसीटीवी फुटेज तीसरी बार चलाई जा रही थी। कमरे में बैठे जांच अधिकारी बिना पलक झपकाए स्क्रीन को देख रहे थे। वीडियो धुंधला था। रात का समय था, लेकिन एक फ्रेम बार-बार रोकने पर साफ होने लगा। गाड़ी के पास खड़े लोगों में से एक व्यक्ति का चेहरा धीरे-धीरे उभर आया। जैसे ही तस्वीर स्पष्ट हुई, कमरे में कुछ सेकेंड के लिए सन्नाटा छा गया। स्क्रीन पर दिख रहा चेहरा रामगोपाल उर्फ गोपाल का था। वही जिसने कुछ दिन पहले थाने में आकर रोते हुए अपनी बेटी की गुमशुदगी दर्ज करवाई थी। पिता बार-बार झूठी कहानी कहता रहा
अब जांच की दिशा बदल चुकी थी। पुलिस ने रामगोपाल को दोबारा पूछताछ के लिए बुलाया। शुरुआत में उसने वही पुरानी कहानी दोहराई- मुझे नहीं पता मेरी बेटी कहां गई। लेकिन इस बार सवाल अलग थे। उसके सामने कॉल रिकॉर्ड रखे गए। लोकेशन मैप दिखाया गया और फिर सीसीटीवी का स्क्रीनशॉट टेबल पर रख दिया गया। कुछ देर तक वह चुप रहा। कमरे में घड़ी की टिक-टिक सुनाई दे रही थी। और फिर धीरे-धीरे उसका आत्मविश्वास टूटने लगा। जांच अधिकारियों के अनुसार, कई घंटों की पूछताछ के बाद उसने जो कहानी बताई, उसने पूरे मामले को खोल दिया। पहले बेटी को जमकर पीटा
19 अक्टूबर 2019 की रात रामगोपाल को पता चला कि उसकी 19 वर्षीय बेटी प्रेम का संबंध करड़ निवासी गणपत से है। यह बात उसके लिए ‘परिवार की इज्जत’ पर चोट जैसी थी। गुस्सा इतना बढ़ा कि उसने उसी रात फैसला कर लिया कि इस रिश्ते का अंत हमेशा के लिए कर दिया जाएगा। घर के अंदर बेटी को बंद कर दिया गया। बाल पकड़कर घसीटा गया और केबल (तार) से बेरहमी से पीटा। बेटी से जबरन फोन करवाकर उसके बॉयफ्रेंड को बुलवाया
पड़ोसियों ने जो चीखें सुनी थीं, वह उसी यातना की आवाजें थीं। करीब दो घंटे तक मारपीट चलती रही। हिंसा यहीं खत्म नहीं हुई। रामगोपाल ने बेटी से जबरन फोन करवाकर गणपत को बुलवाया। लड़की डर से कांप रही थी, लेकिन उसके पास कोई विकल्प नहीं था। फोन पर उसने सिर्फ इतना कहा- मुझे मिलना है। तब तक पीटा, जब तक सांसें न थम गईं
जैसे ही गणपत गांव के पास पलसाना स्थित पेट्रोल पंप के नजदीक पहुंचा, पहले से मौजूद लोगों ने उसका पीछा किया। उसे जबरन पकड़कर घर लाया गया। जांच में सामने आया कि इस पूरी साजिश में रामगोपाल अकेला नहीं था। उसके साथ रिश्तेदार और सहयोगी भी शामिल थे, जिनमें चाचा, मामा और अन्य परिजन थे। आरोपियों में परिवार के करीबी लोग थे, जिन्होंने कथित सम्मान बचाने के नाम पर हिंसा में साथ दिया। घर के दरवाजे बंद किए गए और फिर शुरू हुआ वह हमला, जिसे अदालत ने बाद में ‘नृशंस और राक्षसी’ कहा था। दोनों को लगातार पीटा गया। गुस्से, सामाजिक दबाव और झूठी प्रतिष्ठा की भावना ने इंसानियत को पूरी तरह खत्म कर दिया था। जब दोनों की सांसें थम गईं, तब जाकर हिंसा रुकी। दोनों शवों को पहाड़ियों पर फेंक आए
इसके बाद अपराध को छुपाने की योजना बनाई गई। रामगोपाल और उसके साथियों ने शवों को रात के अंधेरे में गाड़ी में डाला और जीणमाता के मांडोली की पहाड़ियों में फेंक दिया। अगली सुबह उसने खुद थाने जाकर बेटी की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाई और कहानी गढ़ी कि अज्ञात लोग उसे उठा ले गए हैं। फोन लोकेशन, CCTV फुटेज और गवाहों के बयान धीरे-धीरे साजिश की परतें खोलते गए। जांच तत्कालीन सीओ ग्रामीण राजेश आर्य और एएसपी देवेंद्र शर्मा की निगरानी में आगे बढ़ी। पुलिस ने एक-एक कड़ी जोड़ते हुए आरोपियों को गिरफ्तार किया। कुल मिलाकर मामले में कई लोगों को आरोपी बनाया गया। अदालत में सुनवाई शुरू हुई और यह केस धीरे-धीरे राजस्थान के चर्चित ऑनर किलिंग मामलों में शामिल हो गया। 5 साल तक कोर्ट में चलती रही सुनवाई
पांच साल तक चली सुनवाई में अभियोजन (पीड़ित) पक्ष ने 70 गवाह, 270 दस्तावेजी और 16 भौतिक सबूत पेश किए। कोर्ट में सीसीटीवी फुटेज चलाया गया, जिसमें आरोपियों को मारपीट करते हुए देखा गया। हर सुनवाई के साथ यह साफ होता गया कि यह अचानक हुआ अपराध नहीं बल्कि पूरी योजना के साथ की गई हत्या थी। फैसले वाले दिन सीकर की अपर सेशन कोर्ट नंबर-1 में असामान्य भीड़ थी। न्यायाधीश महेंद्र प्रताप बेनीवाल ने लंबा फैसला पढ़ा। अदालत ने कहा कि एक पिता ने झूठे सम्मान के लिए अपनी ही बेटी और उसके प्रेमी की हत्या की, जो समाज की सामूहिक चेतना को झकझोरने वाला अपराध है। कोर्ट ने इस कृत्य को ‘अत्यंत राक्षसी प्रवृत्ति’ बताते हुए दोषी रामगोपाल उर्फ गोपाल को मृत्युदंड की सजा सुनाई। मामले में शामिल अन्य 9 दोषियों को आजीवन कारावास की सजा दी गई, जबकि एक दोषी को सबूत मिटाने के आरोप में तीन साल की सजा सुनाई गई। तीन आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया। गांव में गूंजी एक रहस्यमयी चीख, पहाड़ी पर मिलीं लाशें, पुलिस सीसीटीवी फुटेज देख चौंकी, सुसाइड या मर्डर, पार्ट-1



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