कक्षा 11 में विषय चुनने को लेकर नई व्यवस्था इसी सत्र (2026-27) से लागू कर दी गई है। इसके तहत अब छात्र 3 के बजाय 4 ऑप्शनल सब्जेक्ट ले सकेंगे। ऐसे में अनिवार्य विषय केवल अंग्रेजी रहेगा। जो छात्र 3 विषय ही चुनना चाहते हैं उनके लिए अंग्रेजी-हिंदी अनिवार्
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राज्य सरकार के स्कूल शिक्षा विभाग ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप विद्यार्थियों को उनकी रुचि के अनुसार विषय चयन के अधिक अवसर प्रदान करने के उद्देश्य से ये दिशा निर्देश जारी किए हैं।
संयुक्त शासन सचिव ने जारी किया परिपत्र
इस संबंध में संयुक्त शासन सचिव ने परिपत्र जारी कर सभी सरकारी स्कूलों में कक्षा 11 में विषय चयन की नई व्यवस्था लागू कर दी है। फिलहाल यह व्यवस्था सरकारी स्कूलों में ही रहेगी।
जारी निर्देश के मुताबिक कक्षा 11 में प्रवेश लेने वाला विद्यार्थी स्कूल में स्वीकृत संकाय (कला, विज्ञान, वाणिज्य) में उपलब्ध विषयों में से 4 ऐच्छिक (वैकल्पिक) विषय और एक अनिवार्य विषय (अंग्रेजी) का चयन कर सकता है।
कंप्यूटर साइंस और फिजिकल एजुकेशन का भी विकल्प
अगर किसी विज्ञान संकाय वाले स्कूल में कंप्यूटर विज्ञान विषय स्वीकृत नहीं है, तो भी विद्यार्थी इसे चौथे ऐच्छिक विषय के रूप में चुन सकेगा। बशर्ते स्कूल में कंप्यूटर अनुदेशक का पद स्वीकृत हो।
इसी प्रकार अगर किसी स्कूल में एक ही संकाय (मान लीजिये कला संकाय) है तो स्टूडेंट शारीरिक शिक्षा विषय स्वीकृत न होने पर भी शारीरिक शिक्षा को ऐच्छिक विषय के रूप में चुन सकते हैं। बशर्ते स्कूल में शारीरिक शिक्षा का शिक्षक (PTI) उपलब्ध हो।
विषय चयन की सीमा और विद्यालय प्रधान की भूमिका
निर्देशों में यह भी साफ कहा गया है कि विज्ञान संकाय वाले स्कूलों में चौथे ऐच्छिक विषय के रूप में अधिकतम दो विषय ही संचालित किए जा सकेंगे। इनका चयन संस्था प्रधान करेंगे।
वहीं कला और वाणिज्य संकाय वाले विद्यालयों में चौथे ऐच्छिक विषय के रूप में केवल एक विषय का चयन किया जा सकेगा।
पूर्व व्यवस्था भी रहेगी लागू
जो विद्यार्थी पहले की तरह तीन ऐच्छिक और दो अनिवार्य विषय लेना चाहते हैं, उनके लिए यह व्यवस्था यथावत जारी रहेगी। साथ ही संस्थाप्रधानों को कक्षा 10 के परीक्षा परिणाम से पहले ही संभावित विद्यार्थियों से उनकी रुचि के अनुसार विकल्प प्राप्त करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि विषयों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके।
पाठ्यपुस्तकों और क्रियान्वयन के निर्देश
परिपत्र की प्रतिलिपि संबंधित विभागों, माध्यमिक शिक्षा बोर्ड अजमेर तथा राजस्थान राज्य पाठ्यपुस्तक मंडल को भी भेजी गई है, ताकि आवश्यक पाठ्यपुस्तकों की उपलब्धता और नई व्यवस्था का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके।
राज्य सरकार का यह निर्णय विद्यार्थियों को उनकी रुचि के अनुरूप शिक्षा प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे न केवल विषय चयन में लचीलापन बढ़ेगा, बल्कि विद्यार्थियों के समग्र शैक्षणिक विकास को भी प्रोत्साहन मिलेगा।