MP में 4 महीने की बच्ची की कुपोषण से मौत:रीवा में जुड़वां भाई की हालत गंभीर; सुपरवाइजर-आंगनवाड़ी कार्यकर्ता को नोटिस; झोलाछाप का क्लिनिक सील




मध्य प्रदेश के सतना जिले में कुपोषण से 4 महीने की बच्ची की मौत हो गई, जबकि जुड़वां भाई की हालत गंभीर है। उसे सतना जिला अस्पताल से रीवा मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया, जहां वह PICU में भर्ती है। दोनों बच्चे करीब 15 दिन से उल्टी-दस्त, बुखार और डायरिया से पीड़ित थे। मृत बच्ची सुप्रांशी, सुरांगी निवासी विमला और नत्थू प्रजापति की बेटी थी। उसके जुड़वां भाई का नाम नैतिक है। सही पोषण और समय पर इलाज न मिलने से दोनों की हालत बिगड़ती गई। परिजन बच्चों का इलाज जुगुलपुर गांव के झोलाछाप से कराते रहे। सुपरवाइजर और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता को नोटिस कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार के निर्देश पर कार्रवाई शुरू हुई। महिला बाल विकास विभाग के अधिकारी राजिव सिंह ने सेक्टर सुपरवाइजर करुणा पांडेय और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता पूजा पांडेय को नोटिस जारी कर जवाब मांगा। मझगवां एसडीएम महिपाल सिंह गुर्जर के नेतृत्व में टीम ने बुधवार रात जुगुलपुर गांव में झोलाछाप प्रेमलाल अनुरागी के दवाखाने पर छापा मारा। जांच में करीब 100 तरह की दवाइयां मिलीं। PICU वार्ड में भर्ती कर इलाज परिजन मंगलवार शाम 5 बजे बच्चों को झोलाछाप से मझगवां सीएचसी ले गए। वहां प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें सतना जिला अस्पताल भेजा गया। रात करीब 8 बजे पहुंचने पर दोनों को PICU में भर्ती कर इलाज शुरू किया गया। दोनों बच्चे गंभीर कुपोषण से ग्रसित पाए गए जांच में दोनों बच्चे गंभीर कुपोषण से ग्रसित मिले और उनका वजन सामान्य से काफी कम था। बुधवार शाम करीब 4 बजे इलाज के दौरान सुप्रांशी की मौत हो गई। इसके बाद शव को दादी और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के साथ गांव भेजा गया, जबकि नैतिक को गंभीर हालत में माता-पिता के साथ रीवा मेडिकल कॉलेज भेजा गया। आशा कार्यकर्ता ने नियमित संपर्क नहीं किया मां विमला ने बताया कि टीकाकरण के अलावा किसी योजना का लाभ नहीं मिला। आशा कार्यकर्ता ने नियमित संपर्क नहीं किया, जिससे समय पर सलाह और मदद नहीं मिल सकी। इसे मैदानी अमले की लापरवाही माना जा रहा है। मां का दूध नहीं मिला, गलत आहार से बिगड़ी हालत जांच में सामने आया कि मां की कमजोरी के कारण बच्चों को स्तनपान नहीं मिल पाया। उन्हें बकरी और गाय का दूध पिलाया जा रहा था, जो इस उम्र में खतरनाक है। जन्म से 6 माह तक मां का दूध ही पर्याप्त पोषण देता है, लेकिन परिवार को सही मार्गदर्शन नहीं मिला। जन्म के समय ही कम था वजन परियोजना अधिकारी अभय द्विवेदी के अनुसार, बच्चों का जन्म 21 दिसंबर 2025 को मझगवां सीएचसी में हुआ था। नैतिक का वजन 2.953 किलो और सुप्रांशी का 2.862 किलो था। छह माह तक केवल मां का दूध जरूरी शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. संदीप द्विवेदी के अनुसार, 4 माह के बच्चे का सामान्य वजन 4-5 किलो होना चाहिए। जन्म से 6 माह तक केवल मां का दूध देना चाहिए। बिना लाइसेंस चला रहा था दवाखाना बीएमओ डॉ. रूपेश सोनी ने बताया कि प्रेमलाल अनुरागी के पास इलाज का वैध लाइसेंस नहीं था। वह 15 दिन से बच्चों का इलाज कर रहा था, लेकिन उन्हें अस्पताल नहीं भेजा। टीम ने फर्जी दवाखाना सील कर दवाइयां जब्त कीं। दवाखाना सीज, दवाइयां जब्त, केस दर्ज बीएमओ की रिपोर्ट पर प्रेमलाल अनुरागी पिता गया प्रसाद, निवासी जुगुलपुर के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और मध्य प्रदेश रूजोपचार अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया। कुपोषण का हॉटस्पॉट बना मझगवां, पहले भी हो चुकी हैं मौतें सतना जिले का मझगवां क्षेत्र पहले से ही कुपोषण से प्रभावित माना जाता है। सितंबर 2022 में इसी गांव में सोमवती मवासी नाम की बच्ची की भी कुपोषण से मौत हो चुकी है। इसके बावजूद हालात में सुधार नहीं हुआ। ………………………………….. यह खबर भी पढ़ें सतना में मझगवां में 11 माह की बच्ची की मौत सतना जिले के आदिवासी बहुल मझगवां क्षेत्र में 11 माह की एक बच्ची की मौत के बाद महिला एवं बाल विकास तथा स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया। सोशल मीडिया पर बच्ची की मौत का कारण कुपोषण बताया जा रहा था, लेकिन प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में श्वास नली में दूध फंसने को मौत की वजह बताया गया है। पढ़ें पूरी खबर…



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