सांभर-नरेना मार्ग स्थित टांका गौशाला के पास भैराणा धाम की पवित्र भूमि पर प्रस्तावित औद्योगिक विकास को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। स्थानीय संत समाज, पर्यावरण प्रेमियों और ग्रामीणों ने इस परियोजना का कड़ा विरोध करते हुए 15 अप्रैल से अनिश्चितकालीन धरना
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इसकी जानकारी धाम के साधु-संतों ने जयपुर पहुंचकर पिंकसिटी प्रेसक्लब में दी। इस आंदोलन में हजारों की संख्या में साधु-संतों के जुटने की संभावना है। आरोप है कि परियोजना के तहत बड़ी संख्या में पेड़-पौधों, खासकर खेजड़ी वृक्षों की कटाई की जा रही है, जिससे क्षेत्र में आक्रोश बढ़ गया है।
भैराणा धाम क्षेत्र में प्रस्तावित औद्योगिक विकास का विरोध
भैराणा धाम के संत राम रत्नदास स्वामी ने बताया कि राजस्थान राज्य औद्योगिक विकास एवं निवेश निगम (RIICO) द्वारा भैराणा धाम क्षेत्र में करीब 800 बीघा भूमि औद्योगिक उपयोग के लिए आवंटित की गई है। आरोप है कि पिछले 6 महीनों में यहां बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई की गई है, जिससे पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंचा है।
क्षेत्र में हजारों पेड़-पौधे, विशेषकर खेजड़ी जैसे वृक्ष नष्ट किए गए हैं। यह इलाका असंख्य जीव-जंतुओं और पक्षियों का आवास था। पेड़ों की कटाई से स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र पर गहरा असर पड़ेगा।
धार्मिक भावनाओं पर चोट का आरोप
संत प्रकाश दास महाराज ने कहा कि भैराना धाम एक आस्था का प्रमुख केंद्र है। इस भूमि का औद्योगिक उपयोग “धार्मिक नगरी” की पहचान के विपरीत है। इससे करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत हो रही हैं। 5 अप्रैल को भी विरोध प्रदर्शन किया गया था, जिसके बाद अस्थायी रूप से काम रोका गया, लेकिन स्थायी समाधान अब तक नहीं निकला।
इसके विरोध में 15 अप्रैल, सुबह 10 बजे से विवादित भूमि पर हजारों साधु-संतों की मौजूदगी में धरना दिया जाएगा। जब तक भूमि आवंटन रद्द नहीं होता, आंदोलन जारी रहेगा।