गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे के अररिया जिले से गुजरने वाले हिस्से के लिए भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में तेजी लाने हेतु एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। जिला पदाधिकारी विनोद दूहन ने इस बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें परियोजना से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत चर्चा हुई। बैठक का मुख्य उद्देश्य भूमि का उचित मूल्य निर्धारण, प्रभावित क्षेत्रों की सटीक पहचान और मुआवजे की राशि तय करने की प्रक्रिया की समीक्षा करना था। इसके अतिरिक्त, अन्य आवश्यक प्रशासनिक कार्रवाइयों पर भी विचार-विमर्श किया गया। संबंधित अधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने का निर्देश जिला पदाधिकारी विनोद दूहन ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि मूल्यांकन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी, समयबद्ध और नियमों के अनुरूप होनी चाहिए। उन्होंने किसी भी प्रकार की लापरवाही के प्रति शून्य सहिष्णुता पर जोर दिया और सभी संबंधित अधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने का निर्देश दिया। डीएम ने प्रक्रिया में तेजी लाने को कहा ताकि एक्सप्रेसवे निर्माण कार्य शीघ्र शुरू हो सके। यह बैठक विकास परियोजना को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, साथ ही भूमि मालिकों के हितों की रक्षा पर भी ध्यान केंद्रित किया गया। गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे एक महत्वाकांक्षी परियोजना है जो उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल को जोड़ेगी। यह मार्ग बिहार के पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, शिवहर, सीतामढ़ी, दरभंगा, मधुबनी, सुपौल, अररिया और किशनगंज सहित आठ जिलों से होकर गुजरेगा। अररिया जिले में यह फार्बिसगंज क्षेत्र के निकट नेशनल हाईवे से जुड़ेगा। मुआवजा वितरण निष्पक्ष और समय पर सुनिश्चित किया जाएगा बैठक में अपर समाहर्ता अररिया, अवर निबंधक अररिया, भूमि सुधार उप समाहर्ता अररिया सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे। जिला प्रशासन ने भूमि प्रभावित परिवारों से प्रक्रिया में सहयोग करने की अपील की है और आश्वासन दिया है कि मुआवजा वितरण निष्पक्ष और समय पर सुनिश्चित किया जाएगा। यह पहल एक्सप्रेसवे परियोजना को समयबद्ध तरीके से पूरा करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है। स्थानीय लोगों में इस विकास कार्य को लेकर उत्साह देखा जा रहा है, हालांकि कुछ भूमि मालिक मुआवजे की उचित राशि को लेकर सतर्क हैं। जिला प्रशासन सभी पक्षों को संतुष्ट करते हुए परियोजना को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहा है।
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