पंजाब की प्रमुख अनाज मंडियों में इस बार गेहूं की गुणवत्ता को लेकर चिंता बढ़ गई है। बेमौसम बारिश और मार्च की शुरुआत में अचानक बढ़ी गर्मी का असर फसल पर स्पष्ट दिख रहा है। जगराओं की अनाज मंडी में भी गेहूं के दाने पतले, सिकुड़े हुए और कुछ जगहों पर बदरंग पाए गए हैं, जिससे किसानों को अपनी उपज बेचने में कठिनाई हो रही है। एशिया की दूसरी सबसे बड़ी मंडियों में से एक जगराओं की अनाज मंडी इन दिनों गेहूं के ढेरियों से भरी पड़ी है। किसानों द्वारा लाई गई फसल के ढेर चारों तरफ लगे हैं, लेकिन खरीद प्रक्रिया धीमी होने के कारण उनकी चिंताएं बढ़ती जा रही हैं। ‘टीम ने गेहूं की ढेरियों का निरीक्षण किया मौजूदा स्थिति का जायजा लेने के लिए मंगलवार को केंद्रीय खाद्य मंत्रालय की एक टीम जगराओं अनाज मंडी पहुंची। सहायक निदेशक आशुतोष के नेतृत्व में टीम ने मंडी में विभिन्न स्थानों पर गेहूं की ढेरियों का निरीक्षण किया और पांच सैंपल एकत्र किए। इन नमूनों को जांच के लिए भेजा जाएगा। निरीक्षण के दौरान भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई), खाद्य आपूर्ति विभाग और मार्कफेड के जिला व स्थानीय अधिकारी भी केंद्रीय टीम के साथ मौजूद रहे। केंद्रीय टीम के अधिकारियों ने बताया कि विभाग के निर्देश पर पूरे प्रदेश की प्रमुख अनाज मंडियों से गेहूं के नमूने लिए जा रहे हैं। जांच रिपोर्ट के बाद वास्तविक गुणवत्ता पर निर्णय इन नमूनों की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही गेहूं की वास्तविक गुणवत्ता पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। हालांकि, प्रारंभिक निरीक्षण में यह सामने आया है कि इस बार गेहूं का दाना पिछली फसल के मुकाबले पतला है और उसके रंग में भी कुछ बदलाव दिख रहा है। रिपोर्ट तैयार कर विभाग को भेजी जाएगी अधिकारियों ने यह भी कहा कि निरीक्षण के बाद पूरी रिपोर्ट तैयार कर विभाग को भेजी जाएगी, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई और निर्णय लिया जाएगा। उधर, आढ़तिया एसोसिएशन के प्रधान कन्हैया लाल बांका ने किसानों की परेशानियों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि बेमौसमी बारिश और बढ़ी गर्मी के कारण कई किसानों की फसल को नुकसान जरूर हुआ है, लेकिन गेहूं की गुणवत्ता इतनी खराब भी नहीं है कि उसकी खरीद ही रोक दी जाए।
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