मधेपुरा में वीर कुंवर सिंह विजयोत्सव दिवस के अवसर पर गुरुवार को वेदव्यास महाविद्यालय परिसर में वीर कुंवर सिंह विचार मंच के तत्वावधान में एक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। जहां उपस्थित लोगों ने उनके तैलचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी। कार्यक्रम में वक्ताओं ने 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के महानायक वीर कुंवर सिंह के अदम्य साहस, नेतृत्व क्षमता और देशभक्ति को याद करते हुए उनके योगदान को प्रेरणादायी बताया। 80 वर्ष की आयु में अंग्रेजों के छक्के छुड़ा दिए
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे विचार मंच के अध्यक्ष एवं प्राचार्य डॉ. आलोक कुमार ने कहा कि वीर कुंवर सिंह ने 80 वर्ष की आयु में भी अद्भुत पराक्रम का परिचय देते हुए अंग्रेजों के छक्के छुड़ा दिए थे। उनका जीवन हमें कठिन परिस्थितियों में भी संघर्ष करने की प्रेरणा देता है। वहीं मंच के संरक्षक एवं भाकपा नेता प्रमोद प्रभाकर ने कहा कि 1858 में इसी दिन घायल अवस्था में भी उन्होंने जगदीशपुर के पास ब्रिटिश सेना को पराजित कर किले पर अपना विजय पताका फहराया, जो भारतीय इतिहास का गौरवपूर्ण अध्याय है। विचार मंच के उपाध्यक्ष ध्यानी यादव ने उनके गुरिल्ला युद्ध कौशल की चर्चा करते हुए बताया कि उनकी रणनीति इतनी सशक्त थी कि अंग्रेज उनकी योजनाओं का पता नहीं लगा पाते थे। गोली लगने के बाद घायल हाथ काटकर फेंक दिया
महासचिव युवा अधिवक्ता राहुल कुमार ने कहा कि वीर कुंवर सिंह न केवल एक महान योद्धा थे, बल्कि सामाजिक न्याय और सांप्रदायिक सद्भाव के भी प्रतीक थे, जिनकी सेना में सभी वर्गों और धर्मों के लोगों को समान स्थान प्राप्त था। अधिवक्ता दिलीप कुमार सिंह ने उनके अद्वितीय साहस का उल्लेख करते हुए कहा कि गोली लगने पर उन्होंने अपना घायल हाथ काट कर फेंक दिया, फिर भी युद्ध जारी रखते हुए विजय प्राप्त की। छात्र नेता निशांत यादव और वसीमउद्दीन उर्फ नन्हें ने कहा कि उनकी वीरता की गाथाएं आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करती रहेंगी। इस दौरान वार्ड सदस्य संघ के जिला अध्यक्ष प्रतिनिधि रमेश कुमार शर्मा, विचार मंच के उपाध्यक्ष वीरेंद्र नारायण सिंह, समाजसेवी बाबाजी सिंह सहित कई वक्ताओं ने उनके रणकौशल, वीरता और बलिदान को नमन किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे।
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