मोगा के कस्बा बधनी कलां में बिजली कर्मचारियों ने केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन किया। पी.एस.ई.बी. इंप्लाइज ज्वाइंट फोरम सहित विभिन्न यूनियनों के आह्वान पर कर्मचारियों ने काले बिल्ले लगाकर गेट रैली निकाली। उन्होंने 29 पुराने श्रम कानूनों को समाप्त कर 4 नए श्रम कानून लागू करने का विरोध किया। बिजली कर्मचारियों ने इन “काले कानूनों” को तुरंत वापस लेने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो वह आंदोलन करने को मजबूर होंगे। केंद्र सरकार कॉर्पोरेट घरानों के हित में काम कर रही
टेक्निकल सर्विसेज यूनियन के राज्य उपाध्यक्ष सेवक सिंह ने रैली को संबोधित करते हुए कहा कि श्रमिकों के अधिकारों के लिए पूर्वजों ने लंबा संघर्ष और बलिदान दिया था। इसके बाद मौजूदा कानून लागू हुए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार बड़े कॉर्पोरेट घरानों के हित में काम कर रही है, जिससे मजदूर वर्ग का शोषण बढ़ेगा और उनके अधिकार कमजोर होंगे। “काले कानूनों” को तुरंत वापस लेने की मांग
सब-डिवीजन प्रधान गुरदीप सिंह ने सरकार से इन “काले कानूनों” को तुरंत वापस लेने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो देशभर के किसान, मजदूर, कर्मचारी और अन्य वर्ग मिलकर बड़ा आंदोलन करने को मजबूर होंगे। 10 अप्रैल को बड़े धरने का ऐलान
इस दौरान पंजाब सरकार की भी आलोचना की गई। कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि उनकी मानी हुई मांगों को लागू नहीं किया जा रहा है और महंगाई भत्ता (डी.ए.) भी जारी नहीं किया गया है। इसके विरोध में 10 अप्रैल को पटियाला स्थित हेड ऑफिस पर एक बड़े धरने का ऐलान किया गया है। कर्मचारी और किसान संगठन धरने में शामिल होंगे
इस धरने में बड़ी संख्या में कर्मचारी और किसान संगठन शामिल होंगे। धरने की तैयारी के तहत 5 अप्रैल को मोगा में सर्कल फरीदकोट के कर्मचारियों की एक कन्वेंशन आयोजित की जाएगी। रैली में कई यूनियन नेताओं ने अपने विचार व्यक्त किए और संघर्ष को तेज करने का आह्वान किया।
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