मोहाली सुषमा ग्रांड एनएक्सटी प्रोजेक्ट मेंफर्जीवाड़ा:सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सीबीआई ने दर्ज की एफआईआर, अज्ञात बिल्डर शामिल




रियल एस्टेट सेक्टर में घर खरीदारों को ठगने का एक और बड़ा मामला सामने आया है। सीबीआई (CBI) ने जीरकपुर (पंजाब) के सुषमा ग्रांडे एनएक्सटी प्रोजेक्ट में फ्लैट खरीदारों के साथ हुई करोड़ों की धोखाधड़ी के मामले में एफआईआर दर्ज की है। यह कार्रवाई माननीय सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख और आदेश के बाद की गई है। सीबीआई नें एसबीएल बिल्डर्स प्राइवेट लिमिटेड, एलांते मॉल, चंडीगढ़ स्थित ऑफिस, कंपनी के अज्ञात निदेशक और प्रमोटर, सम्मान कैपिटल लिमिटेड (इंडिया बुल्स) के अज्ञात अधिकारी, और *अन्य अज्ञात मिलीभगत करने वाले लोगों को आरोपित बनााया है। सीबीआई की आर्थिक अपराध शाखा (EO-I, नई दिल्ली) ने इस मामले में आईपीसी की धारा 120-बी (आपराधिक साजिश), 420 (धोखाधड़ी) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(2) व 13(1)(d) के तहत मामला दर्ज किया है। मामले की जांच डीएसपी स्तर के अधिकारी शिवा अर्चन को सौंपी गई है।
यहा समझें पूरा धोधा मामला?
1. एसबीएल बिल्डर्स प्राइवेट लिमिटेड (M/s SBL Builders Pvt Ltd) ने जीरकपुर के गाजीपुर गांव में सुषमा ग्रांड एनएक्सटी नाम से एक आवासीय प्रोजेक्ट शुरू किया था। आरोप है कि बिल्डर ने ‘सबवेंशन स्कीम’ (Subvention Scheme) का लालच देकर खरीदारों को फंसाया। इस स्कीम के तहत खरीदारों को झांसा दिया गया कि कब्जा मिलने तक प्री-ईएमआई (Pre-EMI) का भुगतान बिल्डर करेगा।
2. एफआईआर के अनुसार, बिल्डर ने सम्मान कैपिटल लिमिटेड (पूर्व में इंडिया बुल्स हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड) के अधिकारियों के साथ मिलकर एक आपराधिक साजिश रची। बैंक अधिकारियों ने बिना किसी ‘ड्यू डिलिजेंस’ (उचित सावधानी) के और आरबीआई/एनएचबी के निर्देशों को ताक पर रखकर लोन की पूरी राशि सीधे बिल्डर के खाते में ट्रांसफर कर दी।
3. खरीदार को डबल’ परेशान धोका हो रहा है। उले न घर मिला, न पैसा, दूसरा बैंक ने सिबिल भी खराब करनी शुरू कर दिया है।
अब तक अधूरा है प्रोजेक्ट साल 2017-18 में बुकिंग के बावजूद अब तक न तो निर्माण पूरा हुआ है और न ही किसी को कब्जा मिला है। बिल्डर ने लिखित समझौता किया था कि वह खरीदारों से यूनिट वापस खरीद लेगा, लेकिन इस वादे से भी वह मुकर गया। जब बिल्डर ने प्री-ईएमआई देना बंद कर दिया, तो बैंक ने खरीदारों के खाते से पैसे काटना शुरू कर दिया। डिफॉल्ट होने पर खरीदारों को एनपीए (NPA) घोषित कर दिया गया, जिससे उनका सिबिल स्कोर खराब हो गया।



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