इंदौर से जुड़े पुलिस मारपीट और दुर्व्यवहार के मामले में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने लसूडिया थाना पुलिस पर 10 हजार रुपए का जुर्माना लगाते हुए यह राशि याचिकाकर्ता को मुआवजे के रूप में देने के निर्देश दिए हैं। साथ ही शहर के प्रमुख थानों में बॉडी-वॉर्न कैमरे लगाने का आदेश भी जारी किया गया है। रेस्टोरेंट विवाद के बाद हिरासत, मारपीट के आरोप याचिकाकर्ता हर्ष जावरिया ने याचिका में बताया कि 29 दिसंबर 2025 की रात बॉम्बे अस्पताल के पास एक रेस्टोरेंट में बिल को लेकर विवाद हुआ था। इसके बाद मौके पर पहुंची लसूडिया थाना पुलिस उन्हें और उनके साथियों को हिरासत में लेकर थाने ले गई, जहां उनके साथ मारपीट की गई। आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने प्लास्टिक पाइप से पिटाई की, मोबाइल छीन लिया और रिकॉर्ड किया गया वीडियो भी डिलीट कर दिया। थाने में दुर्व्यवहार और रिश्वत के आरोप याचिकाकर्ता के अनुसार, थाने में उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया गया। उनकी मूंछ खींची गई और करीब एक घंटे तक मारपीट की गई। बाद में कथित रूप से रिश्वत लेकर बिना किसी कानूनी कार्रवाई के छोड़ दिया गया। सीसीटीवी फुटेज पर सवाल सुनवाई के दौरान कोर्ट ने थाने के सीसीटीवी फुटेज तलब किए। रिकॉर्ड में सामने आया कि संबंधित व्यक्तियों को ऐसी जगह ले जाया गया, जहां कैमरे की कवरेज नहीं थी। याचिकाकर्ता पक्ष ने दलील दी कि वीडियो उपलब्ध नहीं है, लेकिन ऑडियो में चीखने और मारपीट की आवाजें साफ सुनाई देती हैं। वहीं शासन पक्ष ने आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि जिस स्थान पर उन्हें रखा गया, वहां महिला अधिकारियों का क्षेत्र होने के कारण कैमरे नहीं लगे थे। कोर्ट की सख्त टिप्पणी हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि पुलिस विभाग बॉडी-वॉर्न कैमरों के उपयोग को लेकर गंभीर नहीं है, जबकि इस संबंध में पहले भी निर्देश दिए जा चुके हैं। कोर्ट ने कहा कि उपलब्ध कैमरों का भी प्रभावी उपयोग नहीं किया जा रहा, जिससे पारदर्शिता प्रभावित होती है। 9 माह में लगाने होंगे कैमरे कोर्ट ने निर्देश दिए कि इंदौर के 35 थानों में से अपराध की दृष्टि से महत्वपूर्ण 5 थानों के सभी पुलिसकर्मियों को 9 माह के भीतर बॉडी-वॉर्न कैमरे उपलब्ध कराए जाएं। इस संबंध में अगली सुनवाई में रिपोर्ट पेश करने के निर्देश भी दिए गए हैं। आदेश की प्रति गृह विभाग, डीजीपी और पुलिस कमिश्नर को भेजने के लिए कहा गया है। बताया गया कि मामले में सुनवाई के बाद 9 अप्रैल को आदेश सुरक्षित रख लिया गया था, जिसे 22 अप्रैल को जारी किया गया।
Source link