वकीलों के चैंबर निर्माण में देरी पर हाईकोर्ट की चेतावनी:अनुपालना रिपोर्ट पेश करने के आदेश, 29 अप्रैल तक रिपोर्ट नहीं देने पर सीएस को किया तलब




राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर मुख्यपीठ ने प्रदेश की अधीनस्थ अदालतों में वकीलों के लिए चैंबर निर्माण के आदेशों की समयबद्ध अनुपालना नहीं होने पर कड़ा रुख अपनाया है। जस्टिस डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस संदीप शाह की खंडपीठ ने इस मामले में आदेश जारी किए हैं। कोर्ट ने राज्य सरकार को चेतावनी दी है कि यदि 29 अप्रैल तक विस्तृत अनुपालना रिपोर्ट पेश नहीं की गई, तो राजस्थान के मुख्य सचिव, विधि विभाग के प्रमुख सचिव और वित्त विभाग के सचिव को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित होना होगा। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता महावीर बिश्नोई, अतिरिक्त सहायक महाधिवक्ता (AAAG) आयुष गहलोत और एम. चयन बोथरा उपस्थित हुए। खंडपीठ ने जब 16 सितंबर 2025 को जारी किए गए समयबद्ध निर्देशों की प्रगति जाननी चाही, तो सरकारी वकील अनुपालना के संबंध में कोई ठोस आश्वासन या जानकारी देने में असमर्थ रहे। हालांकि, मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकारी वकीलों ने कोर्ट से अनुपालना रिपोर्ट पेश करने के लिए एक अंतिम अवसर मांगा, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया। एक को छोड़कर किसी जिले में नहीं हुई पालना सुनवाई के दौरान एक तथ्य यह भी सामने आया कि प्रकरण के प्रतिवादी संख्या 4 की ओर से उपस्थित वकील ने कोर्ट को सूचित किया कि उनके स्तर पर आवश्यक अनुपालना कर ली गई है। दूसरी ओर, याचिकाकर्ता ‘बार एसोसिएशन चूरू’ की ओर से अधिवक्ता संजय रेवाड़ (जो मुख्य अधिवक्ता विकास बिजारणिया की ओर से उपस्थित हुए) ने तर्क दिया कि केवल चूरू ही नहीं, बल्कि बांसवाड़ा, अजमेर, प्रतापगढ़ और अलवर जैसे कई जिलों के कोर्ट परिसरों में बुनियादी सुविधाओं का भारी अभाव है। उन्होंने कहा कि वकीलों के लिए बैठने की उचित व्यवस्था न होना न्याय वितरण की प्रक्रिया में एक बड़ी बाधा है। 30 मई तक पूरा करना है 1250 अदालतों का काम हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि आम नागरिकों को न्याय सुलभ कराने के लिए वकीलों को न्यूनतम बुनियादी सुविधाएं मिलना जरूरी है। कोर्ट ने 16 सितंबर 2025 के उस आदेश का हवाला दिया, जिसके तहत सरकार को प्रदेश की 35 जजों के अधिकार क्षेत्र वाली लगभग 1250 अधीनस्थ अदालतों में चैंबर निर्माण की व्यापक नीति बनानी थी। इस योजना के तहत चैंबर का निर्माण 30 मई 2026 तक पूरा किया जाना जरूरी है। साथ ही, अदालत ने वकीलों के सामूहिक हॉल्स को चैंबर में बदलने के विचार को अव्यावहारिक बताते हुए खारिज कर दिया था।



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